पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इमरान खान ने भारत से पाकिस्तान की हार और चैम्पियंस ट्रॉफी से शर्मनाक तरीके से जल्दी बाहर होने पर निराशा व्यक्त की है, उनकी बहन अलीमा खान ने यह जानकारी दी. रावलपिंडी की अदियाला जेल में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने के बाद अलीमा ने खुलासा किया कि इमरान रविवार 23 फरवरी को दुबई में हुए चिर प्रतिद्वंद्वी भारत के खिलाफ पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन से परेशान थे.
दुबई में चैम्पियंस ट्रॉफी के सबसे हाईप्रोफाइल मुकाबले में पाकिस्तान को छह विकेट से करारी हार झेलनी पड़ी. विराट कोहली ने बेहतरीन शतक जड़ा और भारत ने 241 रन का टारगेट आसानी से हासिल कर लिया.
पीटीआई समाचार एजेंसी के अनुसार अलीमा ने कहा-पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) के संस्थापक ने भारत के खिलाफ मैच हारने पर बहुत दुख व्यक्त किया है. अलीमा ने कहा इमरान ने जेल में रहकर मैच देखा.
इमरान खान ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख मोहसिन नकवी की क्षमताओं पर भी सवाल उठाए और क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में टॉप पोजीशन पर मौजूदा सरकार की नियुक्तियों पर निराशा व्यक्त की. अलीमा ने कहा- इमरान ने कहा कि जब पसंदीदा खिलाड़ियों को निर्णय लेने वाले पदों पर बैठा दिया जाएगा तो अंततः क्रिकेट बर्बाद हो जाएगा.
नजम सेठी ने इमरान पर लगाए संगीन आरोप
दूसरी ओर पूर्व पीसीबी प्रमुख नजम सेठी ने इमरान खान पर प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट के पतन का कारण बनने का आरोप लगाया है.
इमरान के चुनाव के बाद पीसीबी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने वाले नजम सेठी ने दावा किया कि पूर्व कप्तान ने घरेलू क्रिकेट ढांचे के साथ छेड़छाड़ की, जिससे पाकिस्तान की ‘टैलेंट पाइपलाइन’ का पतन हुआ.
2019 में इमरान के निर्देश पर पीसीबी ने घरेलू क्रिकेट संरचना में बदलाव किया. 16-18 डिपार्टमेंटल और रीजनल एसोसिएशन की लंबे समय से चली आ रही प्रणाली को ‘सिक्स टीम फर्स्ट क्लास कंपटीशन’ के साथ बदल दिया.
इमरान के पूर्व साथी रमीज को 2021 में पीसीबी प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन इमरान के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा.
सेठी ने कहा- पाकिस्तान क्रिकेट के पतन की शुरुआत 2019 में हुई, जब एक नए प्रधानमंत्री/संरक्षक के नेतृत्व में नए प्रबंधन ने घरेलू क्रिकेट ढांचे को बदल दिया, जिसने दशकों तक पाकिस्तान की काफी अच्छी सेवा की थी और इसकी जगह एक अनुपयुक्त ऑस्ट्रेलियाई हाइब्रिड मॉडल को शामिल किया. इस दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप जारी रहा, विरोधाभासी पीसीबी नीतियां आदर्श बन गईं.
विदेशी कोचों को काम पर रखा गया और उन्हें वापस भेज दिया गया, सेलेक्टर्स को मनमाने ढंग से नॉमिनेट किया गया, जिन लोगों को हटाया गया था, उनको भर्ती किया गया. इस कारण टीम में गुटबाजी हुई, जिसने मैनेजमेंट को विफल कर दिया. भयानक परिणाम हमारे सामने हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट में अस्थिरता जारी रहने की संभावना है, क्योंकि अंतरिम हेड कोच आकिब जावेद को उनकी नियुक्ति के मात्र चार महीने बाद ही बर्खास्त किए जा सकते हैं.