चंदौली: पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित बिलारीडीह के काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित ऐतिहासिक कजरहवा मेला बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रारंभ हो गया. यह दो दिवसीय मेला धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक है, जो दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
जिला प्रशासन ने मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ और शिवालय की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं. मेले में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आलोक सिंह और सीओ आशुतोष अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद हैं. अलीनगर थाना प्रभारी विनोद कुमार मिश्रा भी अपनी पुलिस टीम के साथ मेले में सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे हैं.
मेले में सजी दुकानें और व्यंजनों की खुशबू मेले को और भी आकर्षक बना रही है. चाट, पकौड़ी, गुड़ की जलेबी, फूल-फलों के साथ बच्चों के खिलौनों और अन्य वस्तुओं की बिक्री सुबह से ही शुरू हो गई. मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए खास व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि हर कोई इस ऐतिहासिक मेले का आनंद ले सके.
कजरहवा मेले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता भी इसे खास बनाती है. कहा जाता है कि इस मेले में रातभर जागकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नृत्य-गान का आनंद लिया जाता था। जागने के कारण आंखों को थकान से बचाने के लिए लोग काजल लगाते थे, जिससे इसका नाम “कजरहवा मेला” पड़ा.
मेले में सांस्कृतिक आयोजन और पारंपरिक प्रस्तुतियां मेले को और भी खास बना देती हैं. श्रद्धालु दूर-दूर से आकर मेले में प्रवास करते हैं और इन आयोजनों का आनंद लेते हैं. मेले के सफल आयोजन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट और प्रशासन की ओर से हरसंभव प्रयास किए गए हैं.
कजरहवा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के संगम का प्रतीक है, जो हर वर्ष महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं को एकजुट करता है.