लखमा के करीबी ओझा से 8 घंटे पूछताछ, अफसरों ने 10 घंटे दफ्तर में रखा

पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी सुशील ओझा से भी ED ने 8 घंटे पूछताछ की। ओझा करीब 10 घंटे बाद ईडी दफ्तर से बाहर निकले। उन्होंने बताया कि गैदू और उनसे अलग-अलग पूछताछ हुई। फरारी के लग रहे आरोपों पर कहा कि वे छत्तीसगढ़ से बाहर थे। बता दें कि कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू से गुरुवार को ED ने 8 घंटे से ज्यादा देर तक पूछताछ की।

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इस दौरान कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में ED दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि भीतर पूर्व मंत्री कवासी लखमा के करीबी सुशील ओझा से भी पूछताछ हो रही थी।

सुशील ओझा ने कहा कि मलकीत सिंह गैदू से क्या पूछा गया इसकी जानकारी मुझे नहीं है, लेकिन मुझसे शराब घोटाले से जुड़े सवाल पूछे गए। मैंने सभी सवालों का जवाब दिया।

ओझा को फरार माना जा रहा था

पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के बंगले में जब रेड पड़ी थी। तब ED की टीम कवासी के करीबी कांग्रेस नेता सुशील ओझा के निवास भी पहुंची थी। हालांकि उस वक्त वे घर पर नहीं मिले। तब उनके परिवार के सदस्यों से ही पूछताछ की गई थी और उन्हें फरार माना जा रहा था।

इसका जवाब देते हुए ओझा ने बताया कि ED की रेड 28 दिसंबर को थी जबकि वे 25 दिसंबर से ही छत्तीसगढ़ से बाहर थे। इसलिए उन्हें फरार समझा जा रहा था, लेकिन वापस लौटने के बाद ED ने जब पूछताछ के लिए बुलाया तब मैं जवाब देने गया।

गैदू को 3 मार्च को फिर से बुलाया गया

मलकीत सिंह गैदू को दस्तावेज लेकर 27 मार्च को बुलाया गया था। 33 पन्नों के दस्तावेज लेकर वे ED के दफ्तर जवाब देने गए थे। इस दौरान जब कई घंटे बाद भी गैदू बाहर नहीं आए। तब कांग्रेस नेताओं ने ED दफ्तर के बाहर बीजेपी कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर की जांच की मांग को लेकर नारेबाजी की।

8 घंटे की पूछताछ के बाद ED दफ्तर से बाहर निकले मलकीत सिंह गैदू ने बताया कि, जो भी दस्तावेज मांगे गए थे मैंने सबमिट किए हैं। उसके बाद भी शराब घोटाले और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से जुड़े सवाल भी पूछे गए। 3 मार्च को फिर से ED ने दस्तावेजों के साथ बुलाया है।

दिल्ली बीजेपी कार्यालय का हिसाब पूछें- बघेल

इस कार्रवाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कहा कि, लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ED कार्रवाई कर रही है। ED और IT का काम कांग्रेस को बदनाम करने का रह गया है। हिम्मत है तो दिल्ली में बने कार्यालय का हिसाब पूछ लें। बीजेपी से भी पूछ लें कांग्रेस से ही पूछेंगे क्या?

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