सक्ती जिले के जैजैपुर से पिहरीद होते हुए गोबराभाठा तक एडीबी द्वारा बनाई जा रही सड़क के किनारे करोड़ों रुपये की लागत से नाली निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार सामने आया है. निर्माण के महज एक माह बाद ही नाली जगह-जगह टूटने लगी है, जिससे नाली निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. सीमेंट की बजाय राखड़ का अधिक प्रयोग किए जाने और नाली के क्रांकीट का हाथ से उखड़ जाना इस बात का संकेत है कि निर्माण कार्य में अनियमितताएं की गई हैं.
इस निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने ठेकेदार पर आरोप लगाया है कि उसने नाली का निर्माण अधूरा छोड़ा और गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा. निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए ग्रामीणों ने बताया कि नाली का पानी उनके घरों में घुसने लगा है, और कई जगह नाली का पानी बाहर बह रहा है, जिससे बदबू फैल रही है। इसके अलावा, नाली पार करते समय कई जगह नाली धंस रही है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है.
जैजैपुर से गोबराभाठा तक 35 किमी लम्बे सड़क और नाली निर्माण के लिए लगभग 80 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी. यह निर्माण कार्य लगभग 9 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन आज तक यह पूरा नहीं हो सका है। ठेकेदार के कार्य में हुई अनियमितताएं और अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की जांच का दबाव बनता जा रहा है.
इसके अलावा, जैजैपुर से मालखरौदा और गोबराभाठा तक सड़क निर्माण के दौरान, ठेकेदार ने नगर पंचायत जैजैपुर के वार्ड क्रमांक 3 और 4 के ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिया है, जिसके कारण ग्रामीणों ने नाली निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है. मुआवजे की राशि की मांग को लेकर ग्रामीणों ने तहसीलदार और कलेक्टर से भी संपर्क किया है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है.
ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा मिलने के बाद ही नाली का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा. ऐसे में सरकार की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं, और यह देखना बाकी है कि इस भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई होती है.