प्रयागराज महाकुंभ के समापन के 11 दिन बाद महाकुंभ में खाली हुए शिविरों की पुआल में लग रही आग से आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है. एनजीटी की तरफ से पराली जलाने पर लगी पाबंदी के बाद सामने आ रही ऐसी घटनाएं आसपास के रहने वाले इलाकों और मेला प्राधिकरण के लिए नई मुश्किल खड़ी कर सकती हैं.
महाकुंभ-2025 के समापन के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण पर 15 दिन के अंदर पूरे मेला क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में लाना है. इसके लिए कचरा निपटान में मेला प्रशासन दिन रात लगा हुआ है. मेला प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि होली से एक सप्ताह पहले सफाई का काम पूरा करना जरूरी है, क्योंकि प्राधिकरण को मेला खत्म होने के 15 दिन के भीतर एनजीटी को व्यापक कचरा निपटान रिपोर्ट सौंपनी है. लेकिन इस बीच कचरा निपटान की प्रक्रिया पूरी करने के दौरान, स्नान घाटों के साथ-साथ मेले के विभिन्न सेक्टरों में कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के लिए जमीन पर बिछाई गईं पुआल या पराली जलाई जा रही हैं. इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं जिससे वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ सकती है.
महाकुम्भ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रमोद शर्मा के अनुसार, मेले के विभिन्न सेक्टरों में बार-बार आग लगने की घटनाएं वास्तविक आग लगने की घटनाएं नहीं है. मेले के विभिन्न सेक्टरों, खासकर स्नान घाटों, जहां रेतीले किनारों को ढंकने के लिए काफी मात्रा में पराली का इस्तेमाल किया गया था, वहां सफाई करने वाले सफाई कर्मचारी अब इसे निर्धारित मानदंडों के अनुसार निपटाने के बजाय जला रहे हैं.
एक-दूसरे पर दोषारोपण, कैसे होगा नियंत्रण?
महाकुम्भ मुख्य अग्नि शमन अधिकारी का कहना है कि इस संदर्भ में तीन दिन पहले मेला अधिकारी ने एक बैठक भी की थी, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सफाई विभाग और अग्निशमन विभाग के अधिकारी शामिल हुए थे. उन्होंने बताया कि बैठक में मेला क्षेत्र में पराली जलाने पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उनके अनुसार, 6 मार्च को सेक्टर 9 में तीन अलग-अलग स्थानों पर पराली के ढेर में आग लगने की सूचना मिली थी, जबकि 7 मार्च को सेक्टर 10 में भी यही सूचना मिली थी.
शनिवार को सेक्टर 18 और 21 में सफाई कर्मचारियों ने पराली जला दी. प्रयागराज के यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभारी डॉ. एसके शुक्ला के अनुसार, मेला क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं और मेला प्रशासन को इसकी जानकारी दे दी गई है, क्योंकि इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ रहा है.
क्या बोले एडीएम?
एडीएम महाकुम्भ विवेक चतुर्वेदी के मुताबिक, स्वच्छता विभाग को मेले के विभिन्न सेक्टरों में मौजूद ठोस कचरे का नियमानुसार निपटान करने और उसे न जलाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. यदि मेला क्षेत्र में सफाई कर्मियों द्वारा पराली जलाने की फुटेज सही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इधर प्रशासन यह भी कह रहा है कि उपद्रवियों द्वारा पराली के ढेर में आग लगाई जा रही है. पुलिस ने ऐसे तीन उपद्रवियों को पकड़ा है तथा मेला पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है. मेला क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है, ताकि ऐसी कोई घटना दोबारा न हो.