छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक युवक की सरनेम बदलने वाली याचिका को खारिज किया है. युवक ने कोर्ट में ज्योतिषी की सलाह पर अपना सरनेम बदलने के लिए याचिका दायर की थी. कोर्ट ने ज्योतिषी की सलाह को कानूनी आधार नहीं मानते हुए युवक की याचिका को खारिज किया है. युवक ने सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की मार्कशीट में 10 साल बाद अपना सरनेम बदलने की मांग की थी.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में ज्योतिषी की सलाह को आधार बनाया था, जिसे कोर्ट ने इसे कानूनी आधार न मनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया. युवक अपना सरनेम सिदार से नायक बदलना चाहता था. याचिकाकर्ता ने 2005 में सीबीएसई की 10वीं और 2007 में 12वीं की परिक्षा पास की थी. मार्कशीट में उसका सरनेम सिदार है, जिसे बदलवाने में लिए उसने 2017 में बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
मार्कशीट में बदलवाना चाहता था सरनेम
याचिकाकर्ता भिलाई निवासी अमित सिंह सिदार और उसके पिता का नाम बसंत सिंह सिदार है. उसने सेक्टर-6 स्थित एमजीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 24 मई 2005 को सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 23 मई 2007 को 12वीं की परीक्षा पास की थी. मार्कशीट में उसके नाम में सरनेम सिदार दर्ज है. अमित और उसके पिता ने सरनेम बदलने के लिए 2016 में ओडिशा के झारसुगुड़ा कोर्ट में हलफनामा दिया था.
कोर्ट ने की याचिका खारिज
अमित सिंह सिदार ने 18 मार्च 2016 और 26 अप्रैल 2016 को कटक राजपत्र में अपने नए सरनेम के साथ नाम पब्लिश कराए. इसके बाद अमित ने 4 नवंबर 2017 को अपने स्कूल के प्रिंसिपल को मार्कसीट में सरनेम बदलने के लिए आवेदन दिया. स्कूल ने उसे सीबीएसई बोर्ड को भेज दिया, जिसे बोर्ड ने इसे बदलने से इनकार कर दिया. इसके बाद अमित ने बिलासपुर हाईकोर्ट में अपना सरनेम बदलने के लिए याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने ज्योतिषी की सलाह को आधार बताया और कहा कि वह ज्योतिष के कहने पर अपना सरनेम बदल रहा है. इसे कोर्ट ने कानूनी आधार न मानते हुए खारिज कर दिया.