अमेरिकी करेंसी को ऊपर उठाने के लिए क्या कुछ नहीं किया गया. डोनाल्ड ट्रंप ने अपना आखिरी दांव टैरिफ भी चल दिया. लेकिन डॉलर में तेजी आने की जगह गिरावट देखने को मिली. डॉलर इंडेक्स गुरुवार को करीब डेढ़ फीसदी तक टूट गया. वहीं शुक्रवार को शुरुआती कारोबारी सत्र में 0.40 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है. इसका मतलब है कि 24 घंटे में डॉलर इंडेक्स में करीब दो फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. वहीं दूसरी ओर रुपए में अच्छा इजाफा देखने को मिल रहा है. टैरिफ ऐलान के बाद भी रुपया गुरुवार को 22 पैसे की उछाल के साथ बंद हुआ. अगर बात आज की भी करें तो रुपए में शुरुआती दौर में 34 पैसे की तेजी देखने को मिल रही है जिसकी वजह से रुपए डॉलर के मुकाबले में 85 के लेवल से नीचे आ गया है.
खास बात तो ये है 10 फरवरी को डॉलर के मुकाबले में रुपया 87.94 के लेवल के साथ लाइफ लोअर लेवल पर पहुंच गया था. करीब दो महीनों में डॉलर के मुकाबले में के मुकाबले में रुपए में करीब 2 रुपए यानी 3.39 फीसदी की तेजी देखने को मिल चुकी है. जबकि मार्च के महीने में रुपए में करीब 7 साल की सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली थी. रेसिप्रोकल टैरिफ के ऐलान से पहले रॉयटर्स पोल का रिजल्ट सामने आया था. जिसमें कहा गया था कि मार्च 2026 के एंड तक रुपया डॉलर के मुकाबले में 87.80 के लेवल पर पहुंच सकता है. इसका मतलब है कि अगले एक साल में रुपया अपने लाइफ टाइम लोअर लेवल को भी नहीं छुएगा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रुपए ने डॉलर को पछाड़ते हुए किस तरह से पूरी बाजी को पलट दिया और डॉलर का बुरा हश्र किस तरह से देखने को मिल रहा है.
रुपए में तेजी
इंटर बैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले 85.07 पर खुला, फिर बढ़त के साथ 84.96 पर पहुंचा, जो पिछले बंद भाव से 34 पैसे अधिक था. गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे बढ़कर 85.30 पर बंद हुआ, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगभग 60 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने के बाद डॉलर अपने प्रमुख समकक्षों के मुकाबले कमजोर हुआ. सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ के नवीनतम दौर से अमेरिकी राजस्व में वृद्धि की उम्मीद थी, लेकिन अनपेक्षित परिणाम अधिक गंभीर हो सकते हैं. चूंकि हाई इंपोर्ट कॉस्ट अंततः उपभोक्ताओं पर बोझ डालेगी, जिससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है.
रुपए क्यों आया उछाल
रुपए में तेजी का प्रमुख कारण ट्रंप के टैरिफ के प्रभाव के बाद डॉलर की व्यापक कमजोरी ने रुपए सहित उभरते बाजार की मुद्राओं को राहत दी है. रुपए में तेजी के प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी बाजार में अमेरिकी मुद्रा की कमजोरी है. विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि टैरिफ के प्रभाव और संयुक्त राज्य अमेरिका में संभावित मंदी के बाद महंगाई के दबावों के बारे में चिंताओं के बीच अमेरिकी मुद्रा कमजोर हुई. इसके अलावा, व्यापारिक साझेदारों की ओर से जवाबी टैरिफ वैश्विक व्यापार मंदी को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे मंदी की आशंका बढ़ सकती है.
डॉलर इंडेक्स में गिरावट
इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0.42 प्रतिशत कम होकर 101.64 पर कारोबार कर रहा था. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.84 प्रतिशत गिरकर 69.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. अमित पबारी ने कहा कि उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में, भारत टैरिफ लड़ाई में अपेक्षाकृत अप्रभावित रहा है, चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में इसे कम शुल्क का सामना करना पड़ रहा है. जबकि प्रमुख निर्यात-संचालित अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका के कठोर शुल्कों से जूझ रही हैं, भारत की प्रभावी दर 26 प्रतिशत पर बनी हुई है, जो फिलीपींस (17 प्रतिशत) के बाद सबसे कम है. पबारी ने कहा कि इससे भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत होती है और इसकी मुद्रा को सापेक्ष लचीलापन मिलता है.
शेयर बाजार में गिरावट
टैरिफ की वजह से संभावित मंदी औरर महंगाई के डर के कारण गुरुवार को अमेरिकी मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. जिसकी वजह से अमेरिकी शेयर बाजार के 2 ट्रिलियन डॉलर डूब गए. उसी वजह से शुक्रवार को भारत का शेयर बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक या 1.23 प्रतिशत गिरकर 75,348.90 अंकों पर आ गया है. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की प्रमुख सूचकांक 350 अंकों से ज्यादा यानी डेढ़ फीसदी की गिरावट के साथ 22,897.85 अंक पर आ गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को शुद्ध आधार पर 2,806.00 करोड़ रुपए के शेयर बेचे.