100 करोड़ के 120 प्लॉट पर वक्फ का कब्जा: रजिस्ट्री के बावजूद नहीं मिला हक, नए कानून से 19 साल बाद जागी उम्मीद…

उज्जैन में नागझिरी के पास शिप्रा विहार कॉलोनी में घर बसाने का सपना देख रहे 120 परिवार बीते 19 वर्षों से प्लाट पर कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) ने वर्ष 2006 में इस कॉलोनी को डवलप कर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए प्लाट निकाले थे। लॉटरी सिस्टम से लोगों को प्लाट आवंटित भी किए गए, कई ने किश्तें भरकर रजिस्ट्री और नामांतरण भी करवा लिया। लेकिन जब लोग अपने प्लॉट पर कब्जा लेने पहुंचे, तो वहां उन्हें रोक दिया गया।

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स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने उस ज़मीन को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए किसी को भी निर्माण की इजाजत नहीं दी। नतीजतन लोग आज तक किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। अब जबकि संसद में वक्फ संशोधन बिल पास हो चुका है, तो 100 करोड़ रुपए से अधिक की इस जमीन पर कब्जा मिलने की उम्मीद जगी है।

UDA की लापरवाही से फंसा मामला

शिप्रा विहार कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों में से एक आशीष निगम बताते हैं, “मेरे पास प्लॉट की रजिस्ट्री, नामांतरण और नगर निगम से पास नक्शा तक है, लेकिन जब भी घर बनाने जाता हूं, स्थानीय लोग मुझे रोक देते हैं। अब तो जिस ज़मीन पर कॉलोनी बसनी थी, वहां कब्रिस्तान बना दिया गया है।”

उन्होंने बताया कि 19 वर्षों में प्लॉट धारकों ने कलेक्टर, विकास प्राधिकरण, वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट तक में गुहार लगाई, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। वक्फ बोर्ड के नियमों के चलते मामला लटकता रहा।

UDA का पक्ष, मामला विचाराधीन

विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। जैसे ही स्टे हटता है, हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

हाल ही में संसद में पास हुए वक्फ संशोधन बिल के बाद अब इन 120 परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद हैं। यदि जमीन विवाद हल होता है, तो वर्षों से अपने घर का सपना संजो रहे परिवारों को राहत मिल सकती है।

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