रीवा : जिले में आबकारी विभाग के जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन द्वारा एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ की गई अभद्रता का मामला सामने आया है. वायरल वीडियो में अनिल जैन एक प्रसिद्ध पत्रकार को न सिर्फ अपशब्द कहते नजर आ रहे हैं, बल्कि उन्हें “गांजा तस्कर” कहकर भी बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह न केवल एक पत्रकार की गरिमा पर हमला है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार भी है.
क्या है पूरा मामला
अनिल जैन पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिनमें बिना बैंक गारंटी के ठेके देना और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रकरण शामिल हैं. हाल ही में ऐसे प्रकरणों में धारा 420, 467, और 468 के तहत केस दर्ज हुए हैं. आरोप है कि आबकारी विभाग के कई अधिकारी, जिनमें अनिल जैन का नाम भी जुड़ता है, अवैध तरीके से शराब के परमिट जारी करते हैं. एक ही परमिट पर तीन अलग-अलग स्थानों के लिए शराब भेजी गई, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है.
जब पत्रकारों ने इन अनियमितताओं पर सवाल उठाए, तो अधिकारी बौखला गए और गाली-गलौज पर उतर आए. उन्होंने पत्रकार को बदनाम करने की कोशिश की और धमकी तक दे डाली कि “तुम्हें गांजा और शराब तस्करी के केस में फंसा देंगे.”
क्या कहता है कानून
इस पूरे प्रकरण में कई धाराएं बनती हैं:
धारा 294 – सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करना धारा 506 – जान से मारने या झूठे केस में फंसाने की धमकी देना धारा 341 किसी को उसकी स्वतंत्रता से वंचित करना (जैसे कार्यस्थल में रोकना या दबाव बनाना)
इन धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। परंतु, अब तक प्रशासन या वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है – न तो अधिकारी को निलंबित किया गया है, न ही कोई विभागीय जांच शुरू हुई है.
प्रश्न यह नहीं है कि कितनी धाराएं लगती हैं, सवाल यह है कि अधिकारी के खिलाफ अभी तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? क्या ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? यदि पत्रकार सवाल नहीं पूछेंगे, तो कौन पूछेगा?
यह मामला केवल एक पत्रकार के अपमान का नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास है. जब अधिकारी यह कहते हैं कि “तुम्हारे बच्चों और परिवार को फंसा देंगे”, तो यह सीधा मानसिक उत्पीड़न है.
यदि प्रशासन स्वयं इस मामले में कार्रवाई नहीं करता है, तो पत्रकार को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में शिकायत दर्ज करनी चाहिए. यह केवल एक पत्रकार का नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता की आजादी का मामला है.