अयोध्या: रामनगरी में वायु प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी तेज, लगातार बढ़ रही नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा

अयोध्या: रामनगरी की वायु को स्वच्छ बनाने के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय और नगर निगम ने संयुक्त पहल शुरू की है. विश्वविद्यालय में हो रहे वायु गुणवत्ता शोध के नतीजे अब नगर निगम को दिए जाएंगे, जिनके आधार पर प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति बनाई जाएगी. यह पहल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की विशेष कोशिशों से संभव हो पाई है.

पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. विनोद कुमार चौधरी के अनुसार, बीते पांच वर्षों से परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण परियोजना के तहत जिले में नियमित सैंपलिंग की जा रही है. शोध से पता चला है कि अयोध्या में बड़ी औद्योगिक इकाइयां न होने के कारण सल्फर ऑक्साइड की समस्या नहीं है, लेकिन निर्माण कार्यों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से वातावरण में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है.

नाइट्रोजन ऑक्साइड फेफड़ों में जलन, दमा और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालती है. धूल कण (PM10) की मात्रा पिछले तीन वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है, जो हृदय रोग, कैंसर और समयपूर्व मृत्यु जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. जिले में वायु गुणवत्ता मापने के लिए दो अनुश्रवण केंद्र स्थापित किए गए हैं, विश्वविद्यालय परिसर और अयोध्या धाम के दिगंबर अखाड़ा भवन पर. शोध के अनुसार, सल्फर ऑक्साइड अम्लीय वर्षा के जरिए फसलों, मिट्टी, जल और धरोहरों को नुकसान पहुंचाता है.

नगर आयुक्त और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हुई मंत्रणा में तय हुआ है कि रिपोर्ट के आधार पर नगर निगम प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल रामनगरी की वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी.

 

 

Advertisements
Advertisement