करोड़ों की सैलरी वाली गूगल की जॉब छोड़ी, 27 साल के इंजीनियर ने बताई ऐसा करने की असली वजह

गूगल जैसी कंपनी में नौकरी मिलना लाखों लोगों का सपना होता है. मोटी सैलरी, रुतबा, ढेरों सुविधाएं और बिग टेक की चमक-दमक—सुनने में सब परफेक्ट लगता है, लेकिन जिम टांग के लिए यह सपना हकीकत में उतना खुशहाल नहीं रहा. सालाना 3 लाख डॉलर (करीब 2.7 करोड़ रुपए) की सैलरी के बावजूद उन्होंने जॉब छोड़ दी और अब कंटेंट क्रिएटर बनकर नई राह तलाश रहे हैं. करोड़ों कमाने के बावजूद उन्हें अपनी जिंदगी बेकार लगने लगी.

अपने जॉब के आखिरी दिन लिंक्डइन पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने साफ कहा कि मुझे लगा था कि गूगल में नौकरी मिल गई तो जिंदगी सेट हो जाएगी, लेकिन यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी. उनका यह रिआइलेजेशन हजारों लोगों से जुड़ गया और उस लंबे वक्त से चली आ रही सोच को चुनौती दे गया कि प्रोफेशनल सफलता ही पर्सनल खुशी के बराबर है.

कॉर्पोरेट से कंटेंट क्रिएशन तक

गूगल छोड़ने से दो महीने पहले ही जिम ने अपना पूरा ध्यान पर्सनल ब्रांड बनाने पर लगा दिया था. उन्होंने लिंक्डइन पर शेयर किया कि कैसे 70 दिनों में 90 से ज्यादा वीडियो और 500 पोस्ट बनाकर 1 लाख से ज्यादा लोगों की ऑडियंस तैयार कर ली. उनके मुताबिक, ग्रोथ कभी सीधी रेखा में नहीं होती.पहले 300 ट्वीट? सिर्फ 70 फॉलोअर्स. पहला इंस्टाग्राम रील? 10 हजार व्यूज रातों-रात. अगली 50 रील्स? ग्रोथ धीमी हो गई, लेकिन तीन हफ्तों में 25 हजार से 80 हजार तक पहुंच गया. इस दौरान उन्होंने न तो महंगे कैमरे खरीदे और न ही किसी बड़े सेटअप का सहारा लिया. सिर्फ iPhone और CapCut ऐप से एडिटिंग कर उन्होंने साबित किया कि असली ताकत क्रिएटिविटी में होती है.

नई शुरुआत

जॉब छोड़ने के कुछ ही समय बाद जिम ने टोक्यो का वन-वे टिकट बुक किया. वे कहते हैं कि पहली बार मैं जिंदगी से भाग नहीं रहा, बल्कि उस ओर जा रहा हूं जिसे मैंने खुद चुना है. अब उनका ध्यान डिजिटल प्रोडक्ट्स बनाने, अपनी ऑनलाइन जर्नी डॉक्यूमेंट करने और अपनी पहचान को एक इंट्रोवर्ट सॉफ्टवेयर इंजीनियर से आगे बढ़ाने पर है.

देखें पोस्ट

कामयाब होना किसे कहते हैं?

लिंक्डइन पर उन्होंने अपने शुरुआती अनुभवों से पांच अहम बातें शेयर की-ग्रोथ कभी सीधी नहीं होती, अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करें, लगातार बने रहें, गैजेट को लेकर ज्यादा न सोचें और समझें कि पर्सनल ब्रांड ही असली ताकत है. जिम लिखते हैं कि रोज पोस्ट करना सिर्फ ऑडियंस नहीं बनाता, यह आपकी पहचान बदल देता है.

उनकी सबसे बड़ी सीख थी मार्क जुकरबर्ग की यह लाइन-आइडियाज कभी पूरी तरह तैयार नहीं होते, वे काम करते-करते ही साफ होते हैं. आपको बस शुरुआत करनी होती है.

आज जिम मानते हैं कि वे गूगल से भी ज्यादा घंटे काम कर रहे हैं, लेकिन फर्क इतना है कि अब वे थकते नहीं, बल्कि हर सुबह जोश से उठते हैं. वे युवाओं को सलाह देते हुए कहते हैं कि दूसरों की राय से अपनी जिंदगी मत चलाइए.आखिरकार नतीजों के साथ जीना आपको ही है.

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