छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे के कोचिंग डिपो में ओएचई तार के करंट की चपेट में आए ठेका मजदूर की मौत के बाद बवाल और तनाव की स्थिति बनी हुई है। परिजन और समाज के लोगों ने डीआरएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने भंडारा लगाकर रात भी बिताई।
आंदोलन का यह सिलसिला पिछले तीन दिन से जारी है। आंदोलनकारी पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा, पत्नी को नौकरी देने समेत बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाने पर अड़े हुए हैं।
रेलवे प्रशासन और ठेकेदार ने झाड़ा पल्ला
इस हादसे के बाद से रेलवे प्रशासन और ठेकेदार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। जिससे अपोलो अस्पताल में भर्ती मजदूर प्रताप बर्मन के परिजन परेशान होते रहे। उन्होंने मंगलवार को डीआरएम कार्यालय का घेराव किया, जिसके बाद कोचिंग डिपो में धरना-प्रदर्शन किया।
बुधवार को भी उन्होंने डीआरएम ऑफिस के सामने धरना-प्रदर्शन किया। लेकिन, रेलवे के अधिकारियों ने उनकी मदद करने से हाथ खड़े कर दिए। अफसरों ने कह दिया कि ठेका श्रमिकों के लिए रेलवे में मदद का प्रावधान नहीं है।
मजदूर की मौत के बाद उग्र हुआ आंदोलन
गुरुवार की सुबह इलाज के दौरान मजदूर प्रताप बर्मन की मौत हो गई, जिसके बाद परिजन और समाज के लोगों का आक्रोश भड़क गया। पहले अपोलो अस्पताल में उन्होंने हंगामा मचाया, जिसके बाद डीआरएम ऑफिस के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
आंदोलनकारियों ने गुरुवार रात डीआरएम ऑफिस के सामने बिताई, जिसके बाद शुक्रवार को भोजन-भंडारा लगाया। इस दौरान रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और मजदूर परिवार के साथ न्याय की मांग करते रहे।
चेतावनी के चलते पीएम के बाद भी नहीं दिया शव
लगातार धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी का रेलवे अफसरों पर कोई असर नहीं दिखा। गुरुवार को शाम 4 बजे शव जिला चिकित्सालय पहुंचने के बाद भी पोस्टमॉर्टम शुक्रवार की दोपहर 3 बजे हो सका। कारण बताया गया कि पुलिस ने दस्तावेज नहीं दिए।
शुक्रवार को पीएम के बाद परिजन ने शव मांगा तो पुलिस वालों ने देने से इनकार करते हुए कहा कि वे शव को उनके गांव छोड़कर आएंगे। इस पर परिजन नाराज होकर हंगामा करने लगे।
डीआरएम ऑफिस से जिला अस्पताल तक चलता रहा हंगामा
मृतक मजदूर के परिजन और समाज के लोगों के साथ ही भीम आर्मी और बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता भी इस आंदोलन में कूद गए हैं। डीआरएम ऑफिस के सामने धरना-प्रदर्शन कर रहे परिजन और समाज के लोग जिला चिकित्सालय परिसर भी पहुंच गए, जहां जमकर नारेबाजी कर शव देने की मांग को लेकर हंगामा मचाते रहे।
काठी में फोटो लगाकर निकाली शव यात्रा
परिजन ने शव ले जाने के लिए जिला अस्पताल में काठी तैयार की थी। जब शव नहीं दिया गया तो वे काठी में मृतक की फोटो लगाकर शवयात्रा निकालकर जिला अस्पताल से डीआरएम कार्यालय पहुंचे। उसे वहां रखकर प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा।
21 लाख मुआवजा का प्रस्ताव, भाई बोला- लौट जाओ
पूरे दिन इंतजार के बाद देर शाम जिला प्रशासन, रेलवे और पुलिस के अधिकारी मृतक प्रताप के परिजन से बात करने पहुंचे। एडीएम शिवकुमार बनर्जी ने धरना स्थल पर बैठे मृतक के परिजन से घटना के लिए पहले खेद जताया, फिर शव के साथ परिजन को गांव तक छोड़ने की बात कही।
उन्होंने परिजन को रेलवे की तरफ से 16 लाख रुपए श्रम न्यायालय के आदेश के बाद और राज्य सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए का मुआवजा देने की बात कही। लेकिन, मृतक की पत्नी ने 1 करोड़ रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग रखी। अफसरों ने जैसे ही मना किया, मृतक के बड़े भाई पंकज ने अफसरों को प्रताप की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि वे सभी वापस लौट जाएं।
प्रदर्शनकारी मृतक की पत्नी को नौकरी, एक करोड़ रुपए मुआवजा और बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन करने की मांग कर रहे हैं।