टेक्नोलॉजी जगत से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारतीय मूल के इंजीनियर ऋषभ अग्रवाल ने मार्क जकरबर्ग की कंपनी Meta की सुपरइंटेलिजेंस लैब को महज पांच महीने के भीतर ही छोड़ दिया है। खास बात यह है कि उन्हें इस पद पर करीब 8 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज मिल रहा था। इसके बावजूद उन्होंने नौकरी छोड़कर सभी को हैरान कर दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक ऋषभ अग्रवाल को Meta की इस लैब में सीनियर स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह लैब आर्टिफिशियल सुपरइंटेलिजेंस पर काम कर रही है, जिसे कंपनी भविष्य की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी मानती है। ऋषभ की टीम का काम ऐसे एआई मॉडल्स बनाना था, जो इंसानी दिमाग से भी आगे की क्षमताएं रख सकें। लेकिन सिर्फ पांच महीने बाद ही उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि, ऋषभ अग्रवाल के इस्तीफे के पीछे की वजह अभी साफ तौर पर सामने नहीं आई है। कुछ सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने के लिए यह कदम उठाया है। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि कार्यस्थल का दबाव और कामकाज का माहौल उनके फैसले का कारण हो सकता है।
ऋषभ अग्रवाल भारतीय मूल के उन चुनिंदा इंजीनियरों में से एक हैं, जिन्हें Meta जैसी दिग्गज टेक कंपनी ने इतने ऊंचे पैकेज पर मौका दिया था। इससे पहले वे कई बड़ी ग्लोबल कंपनियों में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं।
उनके अचानक इस्तीफे ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऋषभ अपना स्टार्टअप शुरू करते हैं तो वे एआई की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। वहीं Meta के लिए यह एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि सुपरइंटेलिजेंस लैब कंपनी की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में काम करने के बावजूद टैलेंटेड इंजीनियर लंबे समय तक टिक क्यों नहीं पाते।