सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने शनिवार को एक कार्यक्रम में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह आवारा कुत्तों के आभारी हैं। उन्होंने बताया कि कानूनी बिरादरी में तो उन्हें उनके काम के लिए जाना जाता है, लेकिन आवारा कुत्तों से जुड़े केस ने उन्हें न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में पहचान दिलाई है।
केरल के तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (KeLSA) द्वारा आयोजित सम्मेलन में जस्टिस नाथ ने यह बात कही। सम्मेलन का विषय था—‘मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व: कानूनी और नीतिगत दृष्टिकोण’। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि अब उन्हें सिर्फ कुत्ता प्रेमियों से ही नहीं बल्कि कुत्तों से भी आशीर्वाद और शुभकामनाएं मिल रही हैं।
जस्टिस नाथ ने यह भी कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश (CJI) के आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें यह मामला सौंपा। दरअसल, उन्होंने उस विशेष तीन जजों की पीठ का नेतृत्व किया था, जिसने दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाने के पहले के आदेश को संशोधित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि पिछला आदेश “बहुत कठोर” था और इस मुद्दे पर “समग्र दृष्टिकोण” की जरूरत है।
नए फैसले में अदालत ने कहा था कि आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण किया जाए और फिर उन्हें उनके मूल इलाकों में छोड़ा जाए। केवल वे कुत्ते जो पागलपन या आक्रामक व्यवहार दिखाते हैं, उन्हें नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
जस्टिस नाथ के इस बयान ने एक गंभीर विषय को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया और दिखाया कि कैसे एक सामाजिक मुद्दे ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनका कहना था कि यह अनुभव उनके लिए अलग और यादगार रहा है।
इस पूरे मामले ने आवारा कुत्तों को लेकर समाज और प्रशासन के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में नई सोच को जन्म दिया है।