राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर गुरुकुल संस्थान में जिले के महाविद्यालयों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, जिले के 50 कॉलेजों ने लिया भाग 

डूंगरपुर: जिले के गुरुकुल आर्ट्स कॉलेज में शनिवार को गोविंद गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति विषयक कार्यशाला का आयोजन हुआ. कार्यशाला ने कुलगुरु प्रो. केएस ठाकुर मुख्य अतिथि रहें. वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के यूनिवर्सिटी प्रभारी अधिकारी एवं उप कुलसचिव प्रो. राजेश जोशी, शोध निदेशक प्रो. नरेंद्र पानेरी, संबद्धता प्रभारी एवं यूनिवर्सिटी क्रीड़ामंडल अध्यक्ष डॉ. राकेश डामोर तथा अस्सिटेंट रजिस्ट्रार डॉ. लोकेंद्र कलाल मंचासीन रहें. गुरुकुल संस्थान निदेशक डॉ. शरद एम. जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यशाला का आयोजन दो सत्र में दिनभर हुआ. संचालन डॉ. सुबोधकांत नायक दिशा डिग्री कॉलेज ने किया. इस दौरान जिले भर के राजकीय और निजी कॉलेजों के संचालक, प्राचार्यगण और टास्क फ़ोर्स के सदस्य उपस्थित रहें.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति कॉलेज के स्टूडेंट्स को केवल डिग्री ही नहीं कौशल देकर आत्मनिर्भरता देगी : प्रो. ठाकुर

एकदिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन एवं प्रथम सत्र में उपस्थित संभागीयो को संबोधित करते हुए जीजीटीयू के कुलगुरु प्रो. के. एस. ठाकुर ने कहा कि पांच वर्ष पूर्व लागू की गई शिक्षा नीति के परिणाम साफ नजर आने लगे है. परंपरागत शिक्षा व्यवस्था के स्थान पर अन्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अध्ययनरत छात्रों के लिए ये केवल डिग्री ही प्रदान नहीं करेगी बल्कि उनके लिए स्किल भी विकसित करेगी और उन्हें रोजगार प्रदान करेगी. इसके लिए जरूरी है कि एनईपी के मेंटर के रूप में महाविद्यालय और कॉलेज के शिक्षक काम करें. उन्होंने यूनिवर्सिटी द्वारा लगातार नवाचारों से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तत्वों को साकार करने में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सभी कॉलेजों को अब परंपरागत ढर्रे से बाहर आकर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने होंगे. इसके लिए यूनिवर्सिटी सभी कॉलेजों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। कॉलेजों को इसके लिए छात्रों की नियमित उपस्थिति पर ध्यान देना होगा और पीपीटी माध्यमों का प्रयोग करना होगा.

समाज के विमर्श में संकीर्णता को समझे और सही ज्ञान को छात्रों तक पहुंचाए : प्रो. जोशी

एकदिवसीय कार्यशाला में बोलते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभारी अधिकारी एवं उपकुलसचिव प्रो. राजेश जोशी ने कहा कि समाज के नेगेटिव विमर्श को शिक्षक वर्ग समझे और समाज में जो नकारात्मक बाते फैलाई जा रही है, राष्ट्रविरोधी ताकत देश को लगातार कमजोर करने में लगी है, उसे समाप्त करने की दिशा में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति सकारात्मक माहौल बनाने का कार्य कर रही। 2047 तक नए भारत के निर्माण में नई एजुकेशन पॉलिसी की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस विजन को मूर्त रूप देने के लिए हमें नए सेमेस्टर सिस्टम को स्वीकार करना होगा। उन्होंने भारतीय प्राचीन प्राकृत साहित्य के महत्व से भी सम्भागीयों को अवगत कराया। साथ ही सत्र के आखिर में भारतीय ज्ञान परम्परा के गौरव की अनुभूति कराने वाले गीत जब जीरो दिया मेरे भारत ने से सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया.

भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व में अनोखी, इसे आधुनिक काल से जोड़कर स्किल हासिल करें : प्रो.पानेरी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय शोध निदेशक प्रो. नरेंद्र पानेरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय पुरातन परंपराओं और विचारधाराओं को पुनर्जीवित करने का आधार है। इसके तहत छात्र की वास्तविक ऊर्जा और उसके विचारों का सदुपयोग हो सकेगा। इसलिए हमें पुराने सिस्टम के स्थान पर इंडियन नॉलेज सिस्टम को आत्मसात करना है.

भाषाओं के विवाद से ऊपर उठ कर मातृ भाषा और राज्यों की भाषा में सहयोग समन्वय भी जरूरी : लोकेंद्र कलाल

कार्यशाला को संबोधित करते हुए यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. लोकेंद्र कलाल ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के दौरान दक्षिणी राज्यों में उत्पन्न हुए भाषा संबंधी विवाद पर प्रकाश डाला और कहा त्रि-भाषा की व्यवस्था में स्थानीय बोली का भी इतना ही महत्व है जितना की हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषा है. इसलिए सभी राज्यों की भाषा को समझने और उसे सीखने का प्रयास करने की आवश्यकता हैं. इससे भाषाई विवाद से बचा जा सकेगा.

नई शिक्षा इंडिया से भारत की और ले जाने वाली : डॉ. डामोर

कार्यशाला में अपनी बात रखते हुए विश्वविद्यालय संबद्धता प्रभारी एवं क्रीड़ामंडल अध्यक्ष डॉ. राकेश डामोर ने नई शिक्षा नीति को इंडिया से भारत की ओर ले जाने वाली शिक्षा पद्धति बताया और कहा कि लंबे समय बाद देश में अंग्रेजों के जमाने की ओर लार्ड मैकाले की विदेशी शिक्षा से निजात मिली है.

आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों का महत्व भी स्वीकारे : प्रो. गणेशलाल निनामा

कार्यशाला में उपस्थित एसबीपी कॉलेज प्राचार्य डॉ. गणेशलाल निनामा ने कहा कि देश की नई शिक्षा नीति युवाओं को स्वदेशी से जुड़ने और स्थानीय उत्पादों से रोजगार प्रदान करने के सहायक है, लेकिन उसके लिए हमें भी अपनी भूमिका अच्छे से निभानी होगी और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी स्किल को भी आगे बढ़ाना होगा.

कार्यशाला में उपस्थित संभागीयों ने समस्याओं से भी अवगत कराया

कार्यशाला के दौरान सभागार में उपस्थित विभिन्न महाविद्यालयों के संभागीयों ने उच्च शिक्षा अंतर्गत टीएसपी क्षेत्र में बढ़ रहे कॉलेज छात्रों के ड्रॉपआउट पर चिंता जताई. वहीं, सेमेस्टर परीक्षा के दौरान लग रहे एग्जाम शुल्क में रियायत देने की मांग रखी.  उपस्थित प्रतिभागियों ने सिलेबस को लेकर आ रही विसंगति पर भी बात रखी। जिस पर यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया.

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