Bihar: सुपौल के अस्पतालों में तीन दिनों तक ओपीडी सेवा ठप रहेगी, बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ यानि भासा के आह्वान पर अपनी मांगों के समर्थन जिले के अस्पतालों में तैनात डाक्टरों ने शनिवार तक ओपीडी कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है.
डाक्टरों के इस निर्णय के पहले दिन गुरुवार को सदर अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी. सुबह जब ओपीडी का समय शुरू हुआ तो लगभग 35 पुर्जा भी कटा. पुर्जा वाले मरीज को डाक्टरों ने देखा भी, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे सभी डाक्टर ओपीडी स्थित अपने कक्ष से निकल गए और अस्पताल भवन के मुख्य द्वार पर जा बैठे.
इस बाबत डा. विनय कुमार ने बताया कि हमलोग ओपीडी के कार्य का बहिष्कार किए हैं. बायोमेट्रिक को लेकर बहुत दिनों से हमलोगों की मांगे थी. बिहार सरकार द्वारा आपातकालीन सेवा को बायोमेट्रिक से मुक्त रखा गया है, लेकिन कई जिलों में वेतन रोक दिया गया है. खासकर गोपालगंज व शिवहर में, जो कानून के विरुद्ध व मनमानापन है. साथ ही हमलोगों के अधिकार का हनन भी है. इसके अलावा हमारी बहुत सारी मांगें हैं, जिसकी पूर्ति नहीं हुई है. हमलोग ऐसे क्षेत्र में हैं जहां अक्सर हिंसात्मक घटनाएं घटती रहती है. हमलोगों के समुचित सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई है. अगर हमारी मांगें नहीं मानी जाती है तो हमलोग इमरजेंसी सेवा और निजी क्लीनिक भी बंद करेंगे.
ओपीडी बहिष्कार के चलते काफी संख्या में मरीज अस्पताल परिरसर में भटकते नजर आए. किसनपुर थाना क्षेत्र के मेहासिमर के प्रमोद राम के बच्चे को जांडिस था. वह उसका इलाज करवाने के लिए सदर अस्पताल आए थे, लेकिन उन्हें जब पता चला कि डाक्टरों ने ओपीडी कार्य का बहिष्कार किया है तो वे काफी मायूस हो गए. उन्होंने बताया कि इतनी दूर से बच्चे का इलाज करवाने के लिए आए, लेकिन इलाज नहीं हो पाया. अब क्या करूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
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