रीवा: मध्य प्रदेश में बिजली विभाग की मनमानी और लापरवाही का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रीवा में एक घरेलू उपभोक्ता को 78,996 का भारी-भरकम बिजली बिल थमाया गया है। लेकिन यह सिर्फ एक अकेला मामला नहीं है. प्रदेशभर में कई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगने के बाद से अचानक बढ़े हुए बिलों से परेशान हैं, मानो बिजली विभाग ने सीधे उनकी जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया हो.
पुलिस विभाग में कार्यरत उपभोक्ता पांडव कुमार अग्निहोत्री को एक महीने का ₹78,996 का बिल मिला, जबकि उनका घर अक्सर खाली रहता है. उनका आरोप है कि अधिकारियों ने न तो उनकी शिकायत सुनी और न ही कोई जांच की. उल्टे, उन्हें कनेक्शन काटने की धमकी दी गई. पांडव कुमार का मामला सिर्फ एक उदाहरण है. प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही शिकायतें लगातार आ रही हैं, जहां स्मार्ट मीटर लगाने के बाद से आम आदमी की बिजली की खपत अचानक कई गुना बढ़ गई है. कई उपभोक्ता बताते हैं कि जिन घरों में पहले 500-700 रुपये का बिल आता था, अब उन्हें 1500-2000 रुपये का बिल थमाया जा रहा है. इसी तरह, जिन उपभोक्ताओं का बिल 3500-4000 रुपये के बीच होता था, अब उन्हें सीधे 11000 से 14000 रुपये तक के बिल आ रहे हैं.
यह स्थिति लोगों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर रही है. उपभोक्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अचानक यह खपत इतनी कैसे बढ़ गई? क्या यह स्मार्ट मीटर की कोई तकनीकी गड़बड़ी है, या फिर यह बिजली विभाग की सोची-समझी रणनीति है ताकि मनमाने तरीके से राजस्व बढ़ाया जा सके? पीड़ित उपभोक्ता पांडव कुमार अग्निहोत्री ने अब न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि प्रदेश में बिजली विभाग की कथित लूट के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत है. सरकार और बिजली विभाग को इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, वरना आम आदमी का भरोसा इस व्यवस्था से पूरी तरह उठ जाएगा.