‘धार्मिक संपत्तियों पर हमले…’, बांग्लादेश पहुंचकर भारतीय विदेश सचिव ने सुनाई दो टूक

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा है कि सोमवार को बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन के साथ मुलाकात में उन्होंने अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया. अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भारत से पहले उच्च स्तरीय दौरे में मिस्री बांग्लादेश गए हैं. मिस्री का यह दौरा ऐसे वक्त में हुआ है जब शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं जिसे लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव देखने को मिल रहा है.

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बांग्लादेश के विदेश सलाहकार हुसैन से मुलाकात के बाद विदेश सचिव मिस्री ने कहा, ‘… हमने हाल की घटनाओं पर भी चर्चा की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित चिंताओं से उन्हें अवगत कराया… हमने सांस्कृतिक और धार्मिक संपत्तियों पर हमलों की खेदजनक घटनाओं पर भी चर्चा की.’

चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद से बांग्लादेश में बढ़ी है हिंसा

5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की खबरें आती रही हैं.

कुछ दिनों पहले इस्कॉन से जुड़े हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था जिसे लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे. चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर भारत ने भी चिंता जताई थी.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का कहना है कि अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है. सरकार यह आश्वासन भी दे रही है कि सभी धार्मिक समुदायों को सुरक्षा दी जा रही है, बावजूद इसके बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले नहीं रुक रहे. बीते गुरुवार को बांग्लादेश हिदू, बौद्ध और ईसाई एकता संघ ने एक बयान जारी किया जिसमें सुनामगंज जिले में अल्पसंख्यकों पर हमले की बात कही गई थी.

एक प्रेस रिलीज में समूह ने लिखा, ‘मंगलारगांव और मोनीगांव ईस्ट गुनीग्राम में हिंदू समुदाय के 100 से ज्यादा घरों और दुकानों पर हमला किया गया, तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की गई… हमले में दोरा बाजार लोकनाथ मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा है. नुकसान की राशि कम से कम 15 लाख टका है.’

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