भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इस हफ़्ते बिहार के उन मतदाताओं को नोटिस जारी करना शुरू किया है, जिनके दस्तावेज मतदाता सूचियों की चल रही विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) के दौरान संतोषजनक नहीं पाए गए हैं. ज़्यादातर नोटिस नेपाल और पश्चिम बंगाल से लगे सीमावर्ती जिलों के लिए जारी किए गए हैं. इस नोटिस के पीछे की वजह गलत या अधूरे दस्तावेज देना बताया गया है.
अधिकारियों ने बताया कि इनमें से ज़्यादातर मामले पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और सुपौल जैसे सीमावर्ती जिलों में पाए गए हैं. इस पूरे मामले पर अगले हफ्ते से सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान अगर संतुष्ट दस्तावेज नहीं दिए जाते हैं. तो उनका नाम वोटर लिस्ट से तो काटा ही जाएगा, इसके साथ ही नागरिकता भी खतरा मड़रा रहा है.
नेपाल और बंगाल से सटे इलाके
बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले SIR कराया गया है. इसके तहत 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. दूसरी तरफ कई लोगों के दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए हैं. यही कारण है कि आयोग इनको दोबारा वेरीफाई करने जा रहा है. नेपाल से सटे इलाकों में डॉक्यूमेंट में कमी पाई गई है. इनमें पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, सुपौल और अररिया नेपाल की सीमा से लगते हैं जबकि पूर्णिया और कटिहार पश्चिम बंगाल की सीमा पर हैं, और किशनगंज नेपाल और पश्चिम बंगाल दोनों की सीमा से लगा हुआ है.
क्यों जारी किए गए नोटिस
चुनाव आयोग ने बताया नोटिस उन मतदाताओं को जारी किए जा रहे हैं जिन्होंने अपने गणना फॉर्म जमा किए थे और ड्राफ्ट रोल में शामिल थे, लेकिन या तो कोई सहायक दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, या गलत दस्तावेज जमा किए हैं, या जिनकी पात्रता – जिसमें नागरिकता भी शामिल है. संदेह के घेरे में है. पूरे राज्य में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन ऐसे मामलों की सबसे ज्यादा संख्या इन सीमावर्ती जिलों से है.
कब होगी इस मामले पर सुनवाई?
इन जिलों के कई निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने बताया कि उन्होंने गणना फॉर्मों की जांच शुरू कर दी है और इस हफ़्ते की शुरुआत में नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है. अगले हफ्ते सुनवाई शुरू होगी. उदाहरण के लिए, पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल विधानसभा क्षेत्र में पहली सुनवाई 3 सितंबर को होगी, जबकि मधुबनी विधानसभा क्षेत्र में पहली सुनवाई 7 सितंबर, 2025 को निर्धारित है.