Bihar: सुपौल जिला न सिर्फ धान खरीद मामले में अपना दबदबा कायम किये हुए है, बल्कि किसानों से खरीदे गए धान के बदले एसएफसी को सीएमआर के रूप में चावल आपूर्ति के मामले में बिहार में पहले पायदान पर है. अब तक जिले में जिन 6790 किसानों से सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद की गई है. उनमें से 5303 किसानों का भुगतान भी कर दिया गया है.
जिले में अब तक 6790 किसानों से 47554.808 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है. इस मामले में जिले का स्थान राज्य में तीसरा है. पहले पायदान पर सिवान तथा दूसरे पर कैमूर जिला है. सबसे खास बात है कि, सीएमआर मामले में जिला राज्य में प्रथम स्थान पर है. अब तक जितने धान की खरीदारी की गई है. उसमें से 4640 एमटी चावल की आपूर्ति कर दी गई है, जो राज्य में किसी भी जिला से अधिक है. इस बीच जिले को धान खरीदारी का भी लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है. इस विपणन वर्ष जिले में एक लाख एक हजार एमटी धान की खरीदारी सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी.
दरअसल गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरकार ने धान खरीद मामले में एक अलग नीति अपनाई. इससे पूर्व जब तक जिले में धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया आरंभ होती थी. तब तक जिले के छोटे और मझोले किस्म के किसान अपने उत्पादन को जरूरत के मुताबिक औने-पौने दामों पर बेच देते थे, जिससे इन किसानों को सरकार की इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पाता था. इस बार सरकार ने ऐसे किसानों की जरूरत को देखते हुए एक नवंबर से ही धान खरीद करने की व्यवस्था कर दी. जिसका परिणाम है कि, धान अधिप्राप्ति को शुरू हुए करीब दो माह के दौरान जिला न सिर्फ बंपर धान की खरीदारी की है. बल्कि चावल आपूर्ति मामले में भी अव्वल है. अब तक जिन 6790 किसानों से धान खरीद की जा चुकी है, उसमें से 5303 किसानों के बीच 87 करोड़ 90 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है.
धान खरीदारी के शुरू हुए लगभग दो माह बाद अब जब विभाग को लक्ष्य प्राप्त हुआ है तो उस हिसाब से लक्ष्य के करीब 47 फीसद धान की खरीद कर ली गई है. जबकि धान खरीदारी को समाप्त होने में अभी करीब दो माह का समय शेष बचा हुआ है. इस तरह देखें तो शेष बचे दिनों में लक्ष्य को पूरा करना कोई मुश्किल नहीं होगा. हालांकि अधिकांश किसानों ने अपनी जरूरत के अनुसार धान बेच चुके हैं. इधर धान बेचे किसान का भुगतान भी लगभग बेहतर है. अब तक जिन 6790 किसानों ने धान बेचा है उनमें से 53003 किसानों का भुगतान कर दिया गया है. इस हिसाब से लगभग 80 फीसद किसानों का भुगतान हो चुका है. सरकार द्वारा समर्थित मूल्य पर धान बेचने के इच्छुक 29680 किसानों ने सहकारिता विभाग के वेबसाइट पर निबंधन कराया है. हालांकि निबंधन का कार्य अभी चालू है परंतु निबंधित किसानों के आंकड़े व अब तक धान बेच चुके किसानों की तुलना करें तो निबंधित किसानों के महज 22 फीसद किसान ही अब तक सरकारी व्यवस्था के तहत धान बेचने में कामयाब हो पाये हैं.
पूछने पर जिला सहकारिता पदाधिकारी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि, पैक्स चुनाव के कारण धान अधिप्राप्ति की गति थोड़ी धीमी थी. चुनाव बाद इसमें तेजी लाने का भरसक प्रयास किया गया. इसी का नतीजा है कि, सुपौल धान खरीद मामले में राज्य में तीसरे स्थान पर है. पहले स्थान पर आने को लेकर समितियों को और तेजी लाने को निर्देशित किया गया है.