कबीरधाम। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा और इसमें शासन शास्त्रों के अनुसार मंत्रिमंडल के जरिए चलेगा। उन्होंने सनातन बोर्ड की जरूरत से इनकार करते हुए कहा कि सनातन धर्म की व्यवस्था प्राचीन काल से चली आ रही है, इसलिए अलग से किसी बोर्ड की आवश्यकता नहीं है।
मोदी-योगी पर गंभीर आरोप, ‘भूत की तरह मेरे पीछे पड़े’ –
कवर्धा में आयोजित धर्मसभा के दौरान शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “योगी और मोदी मेरे पीछे भूत की तरह पड़े हुए हैं। एक आतंकवादी को चार-चार गनर देकर देश-विदेश घुमाया जा रहा है और उसे नकली शंकराचार्य बनाकर महिमामंडित किया जा रहा है। यह सब पीएम मोदी के आश्रय में हो रहा है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश में नकली राष्ट्रपति या नकली प्रधानमंत्री नहीं बन सकते तो नकली शंकराचार्य कैसे बन सकता है?
‘बंटोगे तो कटोगे’ के नारे पर उठाए सवाल शंकराचार्य ने ‘बंटोगे तो कटोगे’ नारे को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि यह धमकी देकर वोट मांगने का प्रयास है, जो संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।
इस पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अब तक हमें किसने काटा है? क्या इससे पहले हम सेफ नहीं थे? राष्ट्रपति, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।”
सनातन शासन व्यवस्था की बात, मंत्रिमंडल की रचना का दिया फॉर्मूला –
शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू राष्ट्र बनने के बाद शासन शास्त्रों के अनुसार चलेगा। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल इस प्रकार गठित होगा :
4 शिक्षाविद ब्राह्मण
8 क्षत्रिय
21 वैश्य (कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य से जुड़े अर्थशास्त्री)
3 शूद्र (कुटीर उद्योगों के संचालन के लिए)
1 सूत (संस्कृति मंत्री के रूप में)
यह पूरी शासन व्यवस्था राजतंत्र कहलाएगी, जिसमें सभी वर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी।
महाकुंभ पर बोले शंकराचार्य, 12 फरवरी को खत्म हो चुका है महायोग
शंकराचार्य ने कहा कि हर 12 साल में कुंभ मेले का आयोजन होता है, लेकिन यह जो 144 साल बाद महाकुंभ आया था, वह 12 फरवरी को समाप्त हो चुका है.
छत्तीसगढ़ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के प्रवेश पर रोक की मांग –
मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर प्रेमासाई महाराज ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के प्रदेश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए।
यह मांग तब उठी जब महाकुंभ भगदड़ के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग की थी। उनके इस बयान से सनातनियों की भावनाएं आहत होने की बात कही जा रही है।