चंदौली : डीडीयू जंक्शन पर तस्करी के बढ़ते मामलों ने रेलवे की सुरक्षा एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जीआरपी ने जंक्शन पर हजारों रुपये की देसी शराब के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है.यह घटना दिखाती है कि जंक्शन पर तस्करों के हौसले बुलंद हैं और सुरक्षा एजेंसियां बड़े तस्करों पर शिकंजा कसने में विफल रही हैं.
डीडीयू जंक्शन पर तस्करी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। चाहे शराब हो, सोना-चांदी, वन्यजीव, या मानव तस्करी, जंक्शन हर प्रकार के अवैध कारोबार का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है.
हालांकि, जीआरपी और आरपीएफ समय-समय पर छोटे तस्करों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपाती रहती हैं, लेकिन तस्करी का मुख्य नेटवर्क अब भी सुरक्षित है.
डीडीयू जंक्शन पर हुई घटनाएं, जैसे दो सुरक्षा कर्मियों की हत्या और तस्करों के एनकाउंटर के बावजूद, तस्करों पर कोई असर नहीं पड़ा है.उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती देते हुए वे तस्करी जारी रखे हुए हैं.
सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी से जंक्शन पर एक समानांतर अवैध नेटवर्क सक्रिय है, जो तस्करी को संगठित रूप से संचालित कर रहा है.
बढ़ती तस्करी रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है.जब तक बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक तस्करों का यह गढ़ बदस्तूर जारी रहेगा.
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए तस्करों पर कड़ी कार्रवाई की अपील की है. साथ ही, स्कैनर और सुरक्षा उपकरणों को तुरंत दुरुस्त करने की आवश्यकता बताई है.
जंक्शन की सुरक्षा व्यवस्था को सुधारने और तस्करी रोकने के लिए अब एक ठोस और संगठित कदम उठाने का समय आ गया है.