धमतरी: कृषि खाद-दवाई की कालाबाजारी करने वालों पर गिरी गाज, विक्रय प्रतिबंध और लाइसेंस रद्द करने की हुई कार्रवाई

कुरुद: कृषकों को उर्वरक उचित दर पर और सुगमता पूर्वक उपलब्ध हो सके, इसके लिए जिले में कृषि विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है. संचालक कृषि राहुल देव के मार्गदर्शन एवं कलेक्टर अविनाश मिश्रा के निर्देशन में उप संचालक कृषि सहित उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी निरीक्षकों की टीम ने जिलेभर में औचक निरीक्षण कर विक्रेताओं की गतिविधियों की गहन समीक्षा की. यह पहल किसानों को राहत प्रदान करने तथा उर्वरक की कालाबाजारी और अनुचित मूल्य पर विक्रय पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

इसी क्रम में जिले के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक कृषि केन्द्रों एवं विक्रय परिसरों में छापामार कार्रवाई की गई. प्रमुख निजी परिसरों में मेसर्स महावर ब्रदर्स कुरूद, मेसर्स नेतराम कृषि केन्द्र मंदरौद, मेसर्स प्रेम कृषि केन्द्र मंदरौद, मेसर्स माँ चण्डी कृषि केन्द्र कुरूद, मेसर्स मधु ट्रेडर्स कुरूद, मेसर्स लक्ष्मी कृषि केन्द्र कोकड़ी, मेसर्स शुभम ट्रेडर्स कोकड़ी, मेसर्स महामाया कृषि केन्द्र संबलपुर सहित कई प्रतिष्ठानों की गहन जांच की गई. निरीक्षण के दौरान जहां विक्रय में अव्यवस्था और अनियमितता पाई गई, वहीं कुछ प्रतिष्ठानों में कालातीत कीटनाशक भी बरामद हुए.

जांच में दोषी पाए गए विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कदम उठाए गए हैं. मेसर्स किसान ट्रेडर्स कुरूद, मेसर्स नेतराम कृषि केन्द्र मंदरौद और मेसर्स प्रेम कृषि केन्द्र मंदरौद को कारण बताओ नोटिस जारी कर विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई की गई है तथा उनसे जवाब मांगा गया है. वहीं, मेसर्स माँ चण्डी कृषि केन्द्र कुरूद में कालातीत कीटनाशक पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई करते हुए विक्रय प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. कृषि विभाग ने जिले के सभी कृषि केन्द्रों एवं विक्रय परिसरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उर्वरक का विक्रय केवल अनुशंसित दर पर ही किया जाए.

किसानों की सुविधा और अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. विभागीय अधिकारियों द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षण जारी रहेगा ताकि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनुशासनहीन गतिविधि पर तत्काल रोक लगाई जा सके. साथ ही उप संचालक कृषि ने कृषकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं उर्वरक अधिक दाम पर बेचे जाने या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में दें, जिससे तत्काल कार्रवाई संभव हो सके. यह अभियान न केवल विक्रेताओं में अनुशासन बनाएगा, बल्कि किसानों को समय पर और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने में भी सहायक सिद्ध होगा.

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