डिंडोरी : कलेक्टर नेहा मारव्या आदिवासी जिला डिंडोरी की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही,जहां दौरे पर जाती हैं अव्यवस्था दिखने पर सुधार के निर्देश देती हैं,लेकिन बावजूद इसके कई हॉस्टल अधीक्षक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी अपने पुराने रवैए पर काम कर रहे हैं.
यही वजह हैं कि कलेक्टर नेहा मारव्या जब डिंडोरी जिला के शहपुरा विकासखंड क्षेत्र की ग्राम बड़झर में बने शासकीय आदिवासी बालक आश्रम औचक निरीक्षण पर पहुंची तो उन्होंने छात्रावास के भीतर पेयजल,शिक्षा,भोजन गुणवत्ता,मेनू अनुसार भोजन,अध्ययन कक्ष,शौचालय सुविधा,साफ सफाई,सुरक्षा, स्टॉक रजिस्टर,खाद्य वितरण पंजी,खाद्य भंडार आदि व्यवस्थाओं का बारीकी से देखा.
कलेक्टर ने अधीक्षक से जब जानकारी ली तब पता चला कि 2016 से आज दिनांक तक कोई स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे ,जिस पर कलेक्टर ने बिना देरी करते हुए आश्रम अधीक्षक कमलेश गौलिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया.
वही विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी शहपुरा जिनकी नियमित जिम्मेदारी बनती है हॉस्टलों के सतत निरीक्षण की वे भी लापरवाही बरतते दिखे उनके निलंबन का प्रस्ताव कलेक्टर ने कमिश्नर जबलपुर की ओर प्रस्तुत किया,साथ ही सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ राजेश मरकाम के द्वारा जिले में संचालित छात्रावासों का सुपरविजन नहीं करने एवं छात्रावासों को सामग्री वितरण का संधारण सही न करने एवं छात्रावासों का सामग्री वितरण रजिस्टर,स्टॉक रजिस्टर व अन्य रजिस्टर के साथ नियमित रूप से जांच न करने पर निलंबित करने के निर्देश दिए हैं.
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि छात्रावास भवन की व्यवस्थाओं को ठीक कराए,इसी तरह कलेक्टर ने सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास बरगांव का निरीक्षण कर छात्राओं को समुचित व्यवस्था देने के निर्देश दिए हैं. कलेक्टर नेहा मारव्या के लगातार दौरे से न सिर्फ शिक्षा विभाग की लापरवाहियां उजागर हो रही है,बल्कि लापरवाह अधिकारियों पर कलेक्टर का हंटर भी चल रहा हैं जिसकी जिले में आमजन सराहना कर रहे हैं.