‘नए अवसरों की खोज, GST में कमी…’ 50% टैरिफ से निपटने के लिए क्‍या-क्‍या कर रही सरकार? पीयूष गोयल ने बताया

भारत के निर्यात पर अमेरिका द्वारा 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल का बड़ा बयान सामने आया है. केंद्रीय व्यापार मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि भारत किसी देश द्वारा की गई ‘एकतरफा कार्रवाई’ से निपटने के लिए क्‍या-क्‍या कदम उठा रही है?

पीयूष गोयल ने कहा कि टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों की मदद के लिए सरकार कई देशों से डील पर चर्चा कर रही है और नए अवसर की तलाश कर रही है. इसके अलावा, केंद्र सरकार ने GST में बड़ी कटौती का प्रस्‍ताव रखा है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत बिल्डकोर के उद्घाटन समारोह में निर्यातकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि आप में से किसी को भी मौजूदा स्थिति से निपटने में किसी भी प्रकार का तनाव या कठिनाई का सामना न करना पड़े.

वाणिज्य मंत्रालय में हम नए अवसरों की तलाश में दुनिया के अन्य हिस्सों में सक्रिय रूप से संपर्क कर रहे हैं. हम घरेलू खपत को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं और आप जल्द ही अगले सप्ताह जीएसटी परिषद की बैठक देखेंगे. इसलिए इन बदलावों का प्रभाव आप सभी को बहुत जल्दी महसूस होगा.

40 देशों से डील की तैयारी में भारत 
27 अगस्‍त का भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी लागू होने के बाद से यह गोयल का यह पहला सार्वजनिक बयान है. भारत टेक्‍सटाइल के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन, संयुक्‍त अरब अमीरात, रूस, जापान और साउथ कोरिया समेत 40 देशों से डील की तैयारी कर रहा है, ताकि भारत का टेक्‍सटाइल सेक्‍टर पर टैरिफ का असर बहुत कम हो.

नए निर्यात के तरीकों पर चर्चा 
इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्‍ताह के शुरुआत में एक अधिकारी ने बताया कि भारत ब्रांड इंडिया विजन के तहत विशेष अभियान चलाने और इंटरनेशनल प्रोटेस्‍टर्स, व्‍यापार मेला और बैठकों में भाग लेना है, ताकि भारत की व्‍यापार मामले में ग्‍लोबल हिस्‍सेदारी बढ़े. उद्योग मंत्रालय भी इस सप्ताह रसायन और आभूषण जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों के साथ कई बैठकें करेगा, ताकि उद्योगों की रक्षा के लिए नए बाजारों में निर्यात को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की जा सके.

टैरिफ से कितना और क्‍या-क्‍या नुकसान? 

गौरतलब है कि 27 अगस्त से लागू हुए 50% टैरिफ से भारत के 48 अरब डॉलर से ज्‍यादा के एक्‍सपोर्ट पर असर पड़ेगा, जिसमें टेक्‍सटाइल, जेम्‍स एंड ज्‍वेलरी, झींगा, चमड़ा और जूते, पशु उत्पाद, रसायन और इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, मशीनरी सबसे ज्‍यादा प्रभावित होंगे. वित्त वर्ष 2025  में भारत के 437.42 अरब डॉलर के वस्‍तुओं के निर्यात में अमेरिका का योगदान करीब 20 फीसदी था और वित्त वर्ष 2022 से वह भारत का सबसे बड़ा व्‍यापारिक साझेदार रहा है.

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