नर्स की जगह महिला गार्ड ने लगाया इंजेक्शन, शासन ने एजेंसी का ठेका रद्द किया

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला अस्पताल में नर्स की जगह महिला गार्ड के मरीज को इंजेक्शन लगाने पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुनवाई के दौरान शासन ने कहा कि, कलेक्टर ने अस्पताल में सिक्यूरिटी एजेंसी का काम बंद कर नगर सेना के जवान तैनात किए गए हैं। डॉक्टरों की अनुमति के बिना इंजेक्शन लगाने वाली गार्ड को सेवा से हटा दिया गया है।

साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है। वहीं, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि, अभी हम याचिका पर सुनवाई जारी रखेंगे, तब तक केस की मॉनिटरिंग करते रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।

दरअसल, अस्पताल में मरीज को महिला गार्ड के इंजेक्शन लगाने की तस्वीर वायरल हुई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर शासन को जमकर फटकार लगाते हुए नाराजगी जताई थी। वहीं कलेक्टर से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था। गुरुवार को केस की सुनवाई के दौरान कलेक्टर ने जवाब पेश किया गया।

जिसमें बताया गया कि सीएमएचओ और सिविल सर्जन को नोटिस जारी किया गया था। उनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला है। इसके चलते संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर अनुशंसा की गई है।

सिक्योरिटी एजेंसी को हटाया, अब नगर सेना के गार्ड रहेंगे तैनात

कलेक्टर ने जवाब में कहा कि, जांच में पता चला कि निजी सुरक्षा एजेंसी फ्लाइंग ग्रुप सिक्योरिटी सर्विसेज का काम बंद करा दिया गया है। वहीं, सुरक्षा एजेंसी में काम करने वाली महिला गार्ड सरिता सिंह राजपूत ने की सेवा समाप्त कर दी गई है। अस्पताल में अब सुरक्षा व्यवस्था बदलते हुए निजी एजेंसी को हटाकर होमगार्ड तैनात किए गए हैं।

हाईकोर्ट बोला- हम मॉनिटरिंग करते रहेंगे

इस मामले की सुनवाई के दौरान कलेक्टर का जवाब सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि, अभी केस की सुनवाई जारी रहेगी, तब तक हम मॉनिटरिंग करते रहेंगे। डिवीजन बेंच ने कहा कि, इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी। इस बीच कलेक्टर और शासन को की गई कार्रवाई पर स्टेटस रिपोर्ट देना होगा।

जानिए क्या है पूरा मामला

बता दें कि, गरियाबंद जिला अस्पताल की एक तस्वीर वायरल हुई। जिसमें अस्पताल की महिला गार्ड एक महिला मरीज को इंजेक्शन लगाती दिख रही है। घटना पिछले 19 अगस्त की है, जब पूर्व पार्षद योगेश बघेल अपने भतीजे के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे।

इस दौरान उन्होंने देखा कि, वार्ड में स्टाफ नर्स की जगह महिला गार्ड मरीज को इंजेक्शन लगा रही है। उन्होंने अपने मोबाइल पर इसकी तस्वीर खींच ली और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसे हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।

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