मऊगंज : रीवा: गडरा कांड के बाद मऊगंज में आदिवासी समाज का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. अशोक कोल की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद हजारों आदिवासी जिला कलेक्ट्रेट के सामने इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और स्थानीय नेताओं—भाजपा विधायक और कांग्रेस नेताओं—दोनों को कठघरे में खड़ा किया.
प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस निर्दोष आदिवासियों को गिरफ्तार कर रही है, विकलांगों और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है. भाजपा विधायक पर प्रशासन का पक्ष लेने और कांग्रेस पर सिर्फ चुनावी राजनीति करने के आरोप लगे.
एक आदिवासी नेता ने कहा,
“हर चुनाव में नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब हमें जरूरत होती है, तो कोई साथ नहीं देता. भाजपा विधायक प्रशासन का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ वोट बैंक की राजनीति कर रही है.”
प्रशासन की सफाई
स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया। पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने कहा,
“प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार किया जा रहा है। जो निर्दोष हैं, उन्हें जांच के बाद उचित प्रक्रिया के तहत राहत दी जाएगी.”
फिलहाल आंदोलन स्थगित, लेकिन संघर्ष जारी
प्रशासन के आश्वासन और तय समय सीमा के वादे के बाद आदिवासी समाज ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे दोबारा बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे.
अब सवाल यह है कि प्रशासन और नेता अपने वादों पर कितना खरा उतरते हैं, या फिर मऊगंज की ये चिंगारी जल्द ही एक और बड़े आंदोलन में बदल जाएगी.