खैरागढ़ जिले के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के 3 प्रोफेसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप है। पीड़िता की शिकायत के बाद जांच में सही पाए जाने के बाद नाट्य विभाग के प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ FIR दर्ज हुई जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
हाल ही में 21 मार्च को राज्यपाल रमेन डेका खैरागढ़ दौरे पर पहुंचे। इस दौरान कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने व्यवस्थाओं में लापरवाही को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। बाद में यह विवाद सुलझ गया था लेकिन 24 मार्च को डॉ. योगेंद्र चौबे ने कुलपति को कलेक्टर के खिलाफ शिकायत कर दी थी।
वहीं, इस मामले में कार्रवाई के बाद डॉ. चौबे के समर्थकों ने इसे प्रशासनिक षड्यंत्र बताया है और सोशल मीडिया पर प्रचार कर रहे है। इस बीच जिला SC समाज विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।
पुलिस के मुताबिक, यौन उत्पीड़न का यह मामला पहले से लंबित था। राष्ट्रीय महिला आयोग से 24 फरवरी को ही जांच के निर्देश मिले थे। पीड़िता की खराब तबीयत के कारण बयान दर्ज करने में देरी हुई।
बता दें कि विश्वविद्यालय के डिजाइनिंग डिपार्टमेंट के वेंकट रमन गुडे के खिलाफ भी इसी तरह का मामला दर्ज हुआ था। जो अभी न्यायालय में विचाराधीन है। कुछ दिन पहले ओडीसी विभाग के एक प्रोफेसर सुशांत सिंह के खिलाफ भी अश्लील वीडियो बनाने का मामला भी सामने आया था। लेकिन उक्त मामले में कार्यवाही नहीं हई।
ये है पूरा मामला
पीड़िता ने 2018-19 में विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग में प्रवेश लिया था। विभागाध्यक्ष डॉ. योगेंद्र चौबे के अधीन पढ़ाई के दौरान कोरोना महामारी के कारण कक्षाएं ऑनलाइन हो गईं। इस दौरान पीड़िता की मां का निधन हो गया और उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई।
जब 2022-23 में उसने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए विश्वविद्यालय से संपर्क किया और फीस में छूट की मांग की, तो डॉ. चौबे ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की। पीड़िता के मुताबिक, डॉ. चौबे ने पीड़िता की फीस भरने के बदले उसके साथ रात बिताने की शर्त रखी।
जब पीड़िता ने इसकी शिकायत तत्कालीन कुलपति और कुलसचिव से की, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके उलट, डॉ. चौबे और उनके समर्थकों ने उसे धमकाया कि यदि उसने शिकायत वापस नहीं ली तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
मानसिक रूप से परेशान होकर पीड़िता इलाज के लिए दिल्ली चली गई। लेकिन वहां भी डॉ. चौबे ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे लगातार अश्लील संदेश और वीडियो भेजता रहा। पीड़िता ने 10 अगस्त, 29 अगस्त और 12 सितंबर 2023 को तीन बार लिखित शिकायत तत्कालीन कुलपति ममता चंद्राकर को दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसके बाद, जब उसने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अपनी शिकायत की स्थिति जाननी चाही, तो तत्कालीन कुलसचिव नीता गहरवार ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वह अब विश्वविद्यालय की छात्रा नहीं है। थक हारकर, पीड़िता ने 6 अक्टूबर 2023 को राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने 24 फरवरी 2025 को खैरागढ़ एसपी को जांच के आदेश दिए। पुलिस ने विस्तृत जांच के बाद आरोपी डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए, जिसके बाद 29 मार्च को एफआईआर दर्ज कर 30 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) आशा रानी ने बताया कि पीड़िता ने यह शिकायत 2023 में ऑनलाइन दर्ज कराई थी, जिसकी जानकारी खैरागढ़ पुलिस को हाल ही में 24 फरवरी 2025 को राष्ट्रीय महिला आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर हुई। चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से संबंधित है और मामले में जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया था, इसलिए एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।