सिंगरौली : हनीट्रेप के शिकार ग्राम पंचायत मझौलीपाठ सरपंच की अब सरकारी नौकरी लग गई है. जहां सरपंच ने अपना त्याग पत्र जिला पंचायत सीईओ को सौपा है. सरपंच के त्याग पत्र को सीईओ ने मंजूर कर लिया है. वही सरपंच की सरकारी नौकरी लगने के बाद हनीट्रेप की कार्रवाई पर ही तरह-तरह के सवाल खड़े होने लगे है. उधर पुलिस को हनीटे्रप की उक्त घटना को बताने में लगी हुई है.
गौरतलब है कि बैढ़न विकास खण्ड के ग्राम पंचायत मझौलीपाठ के देवी सिंह ने अपने साथ हनीटे्रप का शिकार होने की रिपोर्ट सरई थाना में दर्ज कराया था. जहां 3 मार्च को सरपंच देवी सिंह की रिपोर्ट पर सरई थाना टीआई जितेन्द्र सिंह भदौरिया ने महिला रंजना, विमला साकेत, इम्तियाज अली एवं राजकुमार साकेत के विरूध बीएनएस की धारा 308 (7)3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध करते हुए 5 मार्च को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था.
जहां चंद दिनों बाद न्यायालय से जमानत मिल गई थी. सरपंच का आरोप था कि रंजना फोन से बात कर संबंध बनाने का दवाब दी और जब संंबंध बन गया उसके बदले में उक्त महिला व उसकी भाभी 10 लाख रूपये की मांग करने लगी और रकम न देने पर बलात्कार एवं अपहरण जैसे अपराधो में फसाने की धमकी दे रही थी.
पुलिस ने सरपंच एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर हनीटे्रप अपराध मान कर 4 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी. इन आरोपियों में से एक महिला ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़ा की थी. लेकिन तब तक मामला सही मान रहे थे. लेकिन जब मझौलीपाठ सरपंच देवी सिंह का त्याग पत्र सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो तब तक में हनीटे्रप की कहानी कुछ अलग तरीके से समझ में आने लगी.
सरपंच ने जिला पंचायत में सीईओ के यहा आवेदन इस बात का दिया था कि उसकी सरकारी नौकरी लग गई है. सीईओ जिला पंचायत सिंगरौली ने सरपंच देवी सिंह के त्याग पत्र को स्वीकार कर लिया. बताया जा रहा है कि सरपंच देवी सिंह के पिता रौहाल माध्यमिक विद्यालय में हेडमास्टर के पद पर पदस्थ थे. उसी दौरान करीब डेढ साल पूर्व ललन सिंह खैरवार का दुखद निधन हो गया था.जहां देवी सिंह को अनुकम्पा नियुक्ति बतौर भृत्य पद के पद शाउमा विद्यालय सरई में की गई है.
यह नियुक्ति पिछले दिनों हुई है. बहरहाल चर्चा है कि सरपंच पद से त्याग पत्र देने एवं शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी लगने बाद अब हनीटे्रप से जुड़े मामले में कुछ न कुछ कहानियां गढी गई है. ऐसा लोगबाग मान रहे है और इस कहानी में सरई पुलिस भी लपेटे में आ रही है.
हनीटे्रप के मामले में कितनी सच्चाई है. यह तो निष्पक्ष जांच होने के बाद ही सही बात सामने आ सकती है. वही एक महिला फ रियाद के लिए पुलिस अधिकारियों के यहा चक्कर लगा चुकी है. लेकिन उसके आवेदन पत्र को गंभीरता से नही लिया गया.अब शायद पुलिस आलाधिकारी महिला के आवेदन पर विचार कर सकते हैं.