प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलहाल जापान की यात्रा पर हैं, इसके बाद वह चीन के लिए रवाना होंगे. पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि 2 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से जो अनिश्चितता बनी है, उसे देखते हुए भारत-चीन सहयोग ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि एशिया की इन दो ताकतों के बीच स्थिर और अच्छे संबंध दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए भी अहम हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने ये बयान जापान में दिया. वह जल्द ही चीन की यात्रा पर जाएंगे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे.
जापानी अखबार योमिउरी शिंबुन को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के लिए वर्ल्ड इकोनॉमिक ऑर्डर (विश्व आर्थिक व्यवस्था) में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ लंबे समय तक रणनीतिक नज़रिए से रिश्तों को आगे बढ़ाने और विकास से जुड़ी चुनौतियों का हल खोजने के लिए संवाद बढ़ाने को तैयार है.
भारत-चीन रिश्तों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा
पीएम मोदी ने चीन के साथ हाल ही में रिश्तों में आई सकारात्मकता का ज़िक्र किया और कहा कि ये संबंध केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया और दुनिया की शांति के लिए भी अहम है. उन्होंने कहा कि भारत और चीन, जो दो बड़े पड़ोसी और दुनिया के सबसे बड़े देश हैं, अगर आपसी रिश्ते स्थिर और दोस्ताना रखेंगे, तो इसका असर पूरे क्षेत्र और दुनिया की शांति और समृद्धि पर पड़ेगा. यह बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय दुनिया के लिए भी ज़रूरी है.
अमेरिका ने भारत-चीन पर लगाया हैवी टैरिफ
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% आयात शुल्क और रूस से तेल व्यापार पर 25% अतिरिक्त शुल्क शामिल है. इसी तरह अमेरिका ने चीनी सामानों पर शुल्क बढ़ाकर कुल 145% कर दिया है, जिसमें मौजूदा शुल्कों के अलावा 125% अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ा गया है. हालांकि इसका लागू होना फिलहाल टाल दिया गया है.
दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक सुधार हुए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि पिछले साल कज़ान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद भारत-चीन रिश्तों में स्थिर और सकारात्मक सुधार हुए हैं. उन्होंने बताया कि आने वाला शिखर सम्मेलन साझा हितों पर बातचीत और क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान का अहम मंच होगा.
31 अगस्त को चीन जाएंगे पीएम मोदी
पीएम मोदी इन दिनों जापान की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ कई अहम वार्ताएं कीं. 31 अगस्त को वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बुलावे पर तियानजिन जाकर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.
इन मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
एससीओ बैठक से उम्मीद है कि भारत और चीन को द्विपक्षीय मुद्दों, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करने का मौका मिलेगा. इस दौरान आर्थिक सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे मुख्य रहेंगे, जिन पर आपसी भरोसा और समझ बढ़ाने के कदमों पर बात होगी. बता दें कि गलवान संघर्ष के बाद लंबे समय तक सीमा पर तनाव और रिश्तों में खटास रही थी, लेकिन हाल ही में दोनों देशों ने रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज की हैं. ये बदलाव कूटनीतिक जुड़ाव पर नया ध्यान देने और पुराने विवादों को कम करने की इच्छा से प्रेरित है.