अमेरिकी टैरिफ से अछूता इंदौर का दवा निर्यात, व्यापारियों ने इसे चीन से आगे बढ़ने का अवसर बताया…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लागू किए 26 प्रतिशत टैरिफ के बाद इंदौर क्षेत्र के उद्योगों में घबराहट नहीं है। क्षेत्र के उद्योग आने वाली स्थितियों का विश्लेषण करने में लगे हैं। इस बीच उम्मीद जता रहे हैं कि घोषित टैरिफ प्लान से भारत को नुकसान कम और लाभ ज्यादा मिल सकता है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने तो टैरिफ नीति की तुलना ग्लोबलाइजेशन से करते हुए इसे आगे बढ़ने का नया मौका बता दिया है।

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प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर निर्यात के क्षेत्र में अगुवा है। इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में स्थित स्पेशल इकोनामिक जोन (सेज) में करीब 100 उद्योग हैं। ये उद्योग शत-प्रतिशत निर्यात आधारित यूनिट हैं। इनमें दवा कंपनियों का नंबर पहला है।

निर्यात में ज्यादा हिस्सेदारी

कुल निर्यात में आधी से ज्यादा हिस्सेदारी दवाओं की है। शेष निर्यात में पैकेजिंग मटेरियल, आटोमोबाइल पार्ट व अन्य तरह के उत्पाद शामिल हैं। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी कहते हैं कि ट्रंप की टैरिफ पालिसी में कुछ जरूरी वस्तुओं के साथ दवाओं को भी टैरिफ से मुक्त रखा गया है।

ऐसे में पीथमपुर के सबसे बड़े निर्यात सेक्टर पर टैरिफ प्लान का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर अन्य उत्पाद हैं। इन पर टैरिफ लागू भी हुआ तो इस बात की आशंका कम है कि भारतीय उद्योगों को ज्यादा नुकसान होगा। दरअसल अमेरिका ने सिर्फ भारत पर अकेले टैरिफ नहीं लगाया है बल्कि चीन व अन्य तमाम देशों पर भारत के मुकाबले भारी टैरिफ लगा है। इसका लाभ भारत को मिलेगा।

भारत से आयात सस्ता पड़ेगा

चीन पर ज्यादा टैरिफ लगने से वहां की वस्तुएं आयात करना अमेरिका को ज्यादा महंगा पड़ेगा बनिस्बत भारत के। भारत पर लागू टैरिफ चीन के मुकाबले 15 से 18 प्रतिशत कम है। यानी अमेरिका को चीन की बजाय भारत से आयात सस्ता पड़ेगा। टैरिफ से महंगाई अमेरिकी उपभोक्ताओं और आयातकों को लिए भी बढ़ेगी।

लिहाजा वे चीन की बजाय सस्ते आयात के लिए भारत की ओर मुड़ेंगे। मुझे लगता है कि भारतीय उद्योगों को इसे नए मौके के रूप में भुनाना चाहिए। खुद को अपग्रेड करते हुए बेहतर मैन्युफेक्चरिंग से अब चीन को पछाड़कर भारतीय कंपनियां अपना निर्यात बढ़ा सकती हैं। इसे ग्लोबलाइजेशन की तरह देखना चाहिए जिसका नुकसान कम और लाभ ज्यादा मिला था।

सोया क्षेत्र कर रहा समीक्षा

इंदौर क्षेत्र से सोया और इंजीनियरिंग क्षेत्र का निर्यात बड़े पैमाने पर होता है। दि सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक कहते हैं कि सोया इंडस्ट्री पर फिलहाल अलग से टैरिफ को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं हुआ है।

हम विस्तृत जानकारी आने का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिका की ओर से बीते वर्षों में ही कुछ सोया उद्योगों पर पहले से 200 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगा दिया था। ऐसे में इंदौर व मालवा क्षेत्र से सोया डीओसी का निर्यात होता भी है तो अन्य देशों को ज्यादा हो रहा है, अमेरिका को नहीं।

इसे अवसर बनाने की कोशिश

भारत पर भले ही पारस्परिक टैरिफ के रूप में 26 प्रतिशत टैक्स लगा है लेकिन दवा जैसे प्रमुख निर्यात को मुक्त रखने से राहत मिली है क्योंकि अमेरिका भारत की दवाओं पर निर्भर है। एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मप्र के अध्यक्ष योगेश मेहता कहते हैं कि भारत के उद्योगों से ज्यादा अमेरिकी जनता को महंगाई से ज्यादा परेशानी होगी।

इंजीनियरिंग सेक्टर की कंपनियां अमेरिका को निर्यात करती हैं, लेकिन इंदौर की कुछ प्रमुख कंपनियों ने पहले ही अमेरिका में यूनिट खोल ली है। ऐसे में फिलहाल बड़ा प्रभाव तो नहीं दिख रहा। अन्य देशों पर टैरिफ लगने से भारतीय उद्योग चाहें तो इन मौकों को निर्यात बढ़ाने के लिए भुना सकते हैं। एसोसिएशन भी अब इसी सोच के साथ उद्योगों के लिए अवसर ढूंढने में लगा है क्योंकि भारत पर उच्च टैरिफ दर नहीं लगी है।

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