जबलपुर: देश में 42 केंद्रीय सुरक्षा संस्थान है, इसी में एक मध्यप्रदेश के जबलपुर की फैक्ट्री है, जिसका नाम व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर है. निगमीकरण के बाद व्हीएफजे को सेना के तरफ से बड़ा आर्डर मिला है, जिसको पाकर ना सिर्फ अधिकारी बल्कि कर्मचारी भी खुश है. भारतीय सेना की तरफ से 590 स्टेलियन और 800 एलटीपीए जिसकी कीमत करीब 600 करोड़ रुपए है, कि आर्डर मिला है. नया काम मिलने से फैक्ट्री में उत्पादन की रफ्तार बढ़ गई है. व्हीएफजे को अगले फाइनेंशियल ईयर तक सेना को वाहन सप्लाई करना होगा. सेना के साथ-साथ बीएसएफ की टीम भी निर्माणी में डेरा डाले हुए है, इन्होंने 400 से अधिक वाॅटर बाउजर का आर्डर दिया है.
व्हीएफजे की शान है स्टेलियन-एलपीटीए
जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर आजादी के बाद से भारतीय सेना के लिए वाहन तैयार कर रही है. जोंगा जैसी शक्तिशाली गाड़ियों के बाद फैक्ट्री में स्टेलियन और एलपीटीए बनने की शुरुआत हुई थी. 2025-26 वित्तीय वर्ष में 1390 गाड़ियों का आर्डर जब मिला है, तो कर्मचारी, अधिकारियों ने अभी से ही उत्पादन का काम तेज कर दिया है. इसके अलावा सेना से दो आर्डर और मिलना बाकी है, जो कि जल्द ही मिल जाएगा. उन्होंने बताया सेना के इस आर्डर से फैक्ट्री की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी.
अब जान ले दोनों वाहनों की खूबियां स्टेलियन
रफ्तार और ताकत के मामले में स्टेलियन का कोई जवाब नहीं है. भारतीय सेना को स्टेलियन अलग-अलग वैरिएंट में मुहैया कराया जाता रहा है. इसमें 5759 सीसी का टर्बो चार्जड इंजन लगाया जाता है. वाहन की क्षमता 5 टन तक की है. स्पीड- स्टेलियन की स्पीड इतनी मायने नहीं रखती है, जितनी की दुर्गम रास्ते में इसकी पहुंच और बैलेंसिंग अहम है. बहरहाल यह वाहन कुछ ही सेकेंड में 82 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकता है.
वैल्यू- व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने स्टेलियन-4572 और स्टेलियन-4559 की लागत तकरीबन 31 लाख रुपए तय की है. आने वाले दिनों में व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर को प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर लक्ष्य हासिल करना होगा.
एलपीटीए भले ही रफ्तार में स्टेलियन के बराबर ही है, लेकिन ताकत में इंजन कैपेसिटी कुछ काम है. इसकी लोडिंग कैपेसिटी ढाई टन की है. साइज के हिसाब से भी ट्रक अपेक्षाकृत छोटा है. सीमित असला बारूद लाने ले जाने में इसे इस्तेमाल किया जाता है.
स्पीड- स्टेलियन से साइज में छोटे होने का फायदा यह है कि दुर्गम क्षेत्र में इसकी रफ्तार ज्यादा कम नहीं होती है. फोर व्हील ड्राइव होने के कारण इसकी पकड़ मजबूत और ताकत में बैलेंस बना रहता है.
वैल्यू- एलपीटीए की लागत तकरीबन 22 लाख आंकी गई है.नॉनकोर कैटेगरी में आने के बाद व्हीएफजे के आगे खुले बाजार की चुनौतियां हैं, लेकिन हाल फिलहाल इस विकल्प को लेकर निर्माणी के पास एकाधिकार जैसी स्थिति है.
बीएसएफ ने फैक्ट्री में डाला डेरा
बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी कि बीएसएफ की बटालियन भी अपने ऑर्डर के हिसाब से उत्पादन कराने के लिए निर्माणी में डेरा डाले हुए हैं. फैक्ट्री के पास 423 वाटर ब्राउज़र के आर्डर पेंडिंग है. बीएसएफ को कुछ मॉडिफिकेशन भी चाहिए है. फोर्स के तीन कर्नल और सात जवानों को ऑफिसर्स मैच में ठहराया गया है, जो की वोटर ब्राउजर बनने के दौरान मौके पर मौजूद रहते है.