रायगढ़-बिलासपुर के कथक नर्तकों ने चक्रधर समारोह में बांधा समां, ओडिसी नृत्य ने भी मोह लिया मन

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 40वें चक्रधर समारोह के दूसरे दिन कथक और ओडिशी नृत्य की प्रस्तुति ने समां बांध दिया। रायगढ़ और बिलासपुर की कथक नृत्यांगना ने अपने नृत्य की प्रस्तुति दी। जिसे देखने के लिए काफी संख्या में दर्शक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे।

रायगढ़ की सुविख्यात कथक नृत्यांगना पूजा जैन और उनकी टीम ने गुरुवार को मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत पंचदेव वंदना से हुई। इसके बाद उन्होंने जयपुर घराने के तोड़े-टुकड़े, लखनऊ घराने का तराना और ठुमरी प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूजा जैन के साथ मंच पर उनकी टीम की सौम्या साहू, पाव्या श्रीवास्तव, आसिता वर्मा और वंशिका पात्रा भी शामिल रहीं।

जिन्होंने अपने सधे हुए भाव और नृत्य कौशल से प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया। इसके बाद रायगढ़ की नृत्यांगना राजनंदनी पटनायक ने अपनी साथी पूनम गुप्ता के साथ मिलकर ओडिशी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। दर्शकदीर्घा में बैठे श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन और उत्साहवर्धन किया।

बिलासपुर की कथक नृत्यांगना की मनमोहक प्रस्तुति

बिलासपुर से आई प्रख्यात कथक नृत्यांगना प्रियंका सलूजा ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी का मन मोह लिया। कथक की भाव मुद्राओं के लिए प्रियंका में विशेष दक्षता है। उन्होंने कत्थक के माध्यम से दर्शकों के समक्ष एक मनमोहक प्रस्तुति दी।

लोकगायक श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

गुरुवार की शाम चक्रधर समारोह में प्रदेश के लोकप्रिय लोकगायक सुनील मानिकपुरी ने अपनी सुरीली आवाज से ऐसा समा बांधा कि पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सुनील मानिकपुरी ने अपने सुप्रसिद्ध गीत “हमर पारा तुहर पारा”, “गुईया रे गुईया रे”, “का जादू डरे” जैसे झारखंडी और लोकगीतों के साथ कर्मा और शैला गीतों ने समारोह के पूरे वातावरण को संगीतमय कर दिया।

उनकी मधुर स्वर लहरियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के निवासी सुनील मानिकपुरी छत्तीसगढ़ के चर्चित लोकगायक हैं।

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