Bihar: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मक्के की खेती तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस फसल को एक नए खतरे का सामना करना पड़ रहा है. फॉल आर्मीवर्म कीट ने मक्के की फसल को अपना निशाना बना रहा है, जिससे किसानों को पैदावार में बड़ा नुकसान हो सकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र, कटिहार के वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म कीट मक्के की फसल को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. यह कीट पौधे को बढ़ने की शक्ति को समाप्त कर देता है और यदि समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट पूरा पौधा ही चट कर जाता है.
पहचान करना बहुत आसान
डॉ. कुमार ने बताया कि इस कीट की पहचान करना बहुत आसान है, इसके वयस्क कीट 32 से 40 मीली मीटर लंबा, नर पतंगों में अगले पंख के मध्य भाग पर एक हल्का पीले रंग का धब्बा एवं कोने पर सफेद रंग का धब्बा होता है. मादा पतंग के अगले भाग पर धुंधला निशान होता है.
उन्होंने बताया कि इस कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को विशेष ध्यान देना होगा. इसके लिए नीम तेल, स्पाइनटोरम, क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोएल और थायोमीथोक्साम+लेम्डसायेहेलोथ्रिम जैसी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है.
कीट के नियंत्रण
डॉ. पंकज ने बताया कि किसानों को इस कीट के नियंत्रण के लिए विशेष रूप से तैयार की गई चारा का भी उपयोग करना चाहिए, इसके लिए दो-तीन लीटर पानी में 10 किलो चावल की भूसी के साथ दो किलो गुड़ मिलाकर मिश्रण को 24 घंटे छोड़ देना चाहिए, इसके बाद इसमें 100 ग्राम “थायोडीकार्व 75%wp” मिलाकर इसके छोटे- छोटे गोली बनाकर शाम के समय खेत में डाल देने से इस प्रकार के कीटों से मक्का फसल को बचाया जा सकता है.