प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 में भाग लिया, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित वैश्विक नेताओं से मुलाकात की. इस मंच पर प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मान और विश्वास की आवश्यकता पर जोर दिया, जो चीन के साथ भारत के संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है. जिनपिंग और मोदी की बीच हुई बैठक को लेकर एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस बैठक से देश जिन मुद्दों का जवाब का उम्मीद कर रहा था, उस पर कोई भी ठोस नतीजा सामने नहीं आया है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ओवैसी ने पोस्ट करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं. ओवैसी ने कहा कि सबसे अहम सवाल चीन का पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान समर्थन देना और अफगानिस्तान तक CPEC का विस्तार है. इस पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला.
उन्होंने कहा कि चीन की ओर से नदी जल संबंधी आंकड़ों को शेयर करने का भी आश्वासन नहीं दिया गया. लद्दाख में बॉर्डर की स्थिति भी ऐसी है कि भारत के बहादुर सैनिक आज भी बफर ज़ोन में गश्त नहीं कर सकते. साथ ही 2020 से हमारे पशुपालकों को कई इलाकों में जाने से रोका जाता है.
ओवैसी ने कहा कि न ही चीन की ओर से वादा किया गया कि वो भारत को रेयर अर्थ मटेरियल और अन्य अहम सामग्रियों की आपूर्ति फिर से शुरू करेगा. इसके अलावा, चीन ने ये भी नहीं कहा कि वह भारत से आयात में बढ़ोतरी करेगा.
ओवैसी ने मोदी-जिनपिंग की बैठक पर तंज कसते हुए कहा, ‘ये सभी भारतीय के मुद्दे थे. न कि फोटो सेशन करवाना या जैकेट का रंग या कालीन की लंबाई. दुर्भाग्य से दोनों नेताओं के बीच मुलाकात सार्थक मुद्दों पर विफल रही.’