इस तकनीक से बंजर जमीन पर किसानों ने रचा सफलता का इतिहास, हर साल कमा रहे लाखों का मुनाफा

सीकर: राजस्थान का शेखावाटी इलाका, जो मीठे प्याज के लिए देशभर में फेमस है. लेकिन, अब यहां के किसान बाजरा और मूंगफली के साथ खीरे और टमाटर की खेती में हाथ आजमा रहे हैं. इन किसानों ने अपने खेत में अलग-अलग हिस्सों में पॉली हाउस लगाकर कम पानी में भी खेती की. हम ऐसे 2 किसानों की  बात कर रहे है जिन्होंने बंजर जमीन पर खीरे-टमाटर की फसल उगाकर लाखों की कमाई की है.

ये किसान है सीकर के खूड़ गांव के रहने वाले महेंद्र सांखला और मुकेश. महेंद्र ने पुराना बिजनेस बंद कर खेती का रुख किया तो मुकेश ने सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़कर किसान बनना तय किया. इनकी जर्नी में यूट्यूब के वीडियो भी मददगार रहे.

8 बीघा जमीन पर खीरे की खेती

सीकर से करीब 30 किलोमीटर दूर खूड़ गांव में किसान महेंद्र सांखला खीरे की खेती करते हैं. यहां 4-4 बीघा में दो पॉली हाउस बना रखे हैं. महेंद्र ने बताया कि गांव में ही उनकी हार्डवेयर की दुकान थी. करीब 20 साल तक उन्होंने बिजनेस किया. दुकान से सिर्फ घर खर्च और बच्चों की पढ़ाई की फीस ही निकल पाती थी. एक दिन वे दांतारामगढ़ क्षेत्र के दूणों की ढाणी में अपने परिचित के साथ काम से गए हुए थे. वहां एक किसान ने अपने खेत में पॉली हाउस में खेती कर रखी थी. वहां से उन्होंने पॉली हाऊस की पूरी टेक्निक समझी.

बंजर पड़ी जमीन पर खेती करने का मन बनाया

महेंद्र ने बताया कि इसके बाद मैंने यूट्यूब पर वीडियो देखे. करीब एक महीने तक यूट्यूब पर पॉली हाउस में खीरे की खेती के वीडियो देखे और प्रोसेस को फिर से समझा. इसके बाद 10 से 12 लाख रुपए की लागत से 4 बीघा बंजर जमीन में पहला पॉली हाउस लगाया. दो महीने की मेहनत में पूरा पॉली हाउस खीरों से भर गया था.

पहली बार में 10 लाख का मुनाफा, यूपी, दिल्ली तक सप्लाई

महेंद्र ने बताया कि चार बीघा में पहली बार 40 टन खीरे का उत्पादन हुआ. इसके बाद सीकर में जाकर खीरे की मार्केटिंग करना शुरू किया. यहां व्यापरियों से कॉन्टैक्ट किया. धीरे-धीरे सीकर के व्यापारियों से खरीदी शुरू की. इसके बाद सीकर के अलावा दिल्ली और यूपी समेत अन्य राज्यों के व्यापारी भी उनसे खीरा खरीदने लगे. महेंद्र ने बताया कि पहली फसल में उन्हें 10 लाख रुपए की इनकम हुई थी. इसमें 6 लाख रुपए का खर्चा आया था.

किसान ने बताया कि पहली खेती में अच्छा मुनाफा होने के बाद दूसरे 4 बीघा खेत में दूसरा पॉली हॉउस लगाया और खीरे की खेती शुरू की. अब वे सालाना 20 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं. खीरे के साथ वे बाजरा और मूंगफली की भी खेती भी कर रहे है.


अब पढि़ए एक और किसान की कहानी, जिसने बंजर जमीन पर की सब्जियों की खेती

2015 में पढ़ाई पूरी होने के बाद शुरू की कॉम्पिटिशन की तैयारी. खूड़ गांव के रहने वाले मुकेश बाकोलिया ने बताया कि 2015 में पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी होने के बाद अलग-अलग कॉम्पिटिशन की तैयारी की. वह बीए भी कर चुका था. इसके बाद सीकर में नौकरी की तलाश की, लेकिन जॉब नहीं लगी. इस बीच परिवार ने कॉ​म्पिटिशन की तैयारी के लिए मना कर दिया. उनके पास 4 बीघा जमीन थी, लेकिन वह बंजर थी. मुकेश ने बताया कि इस पर खेती करना काफी मुश्किल था.

मूंग, बाजरा और मूंगफली की खेती के साथ शुरू की खीरे की खेती

मुकेश कुमार का कहना है कि परिवार पहले से मूंग, बाजरा और मूंगफली की खेती कर रहा था. इसके बाद किसी ने बताया कि पॉली हाउस में खीरे की खेती कर सकते. आस-पास के किसानों के पास जाकर इसके बारे में पता किया और बंजर जमीन पर पॉली हाउस लगाया. साल 2021 में पहली बार खीरे की खेती शुरू की.

इसका नतीजा ये रहा कि पहली बार में 4 बीघा पर खीरे की खेती से 10 लाख रुपए की आय हुई. हाल ही में उन्होंने पॉली हाउस में ही टमाटर की खेती शुरू की है. इतना ही नहीं इसके लिए उन्होंने पॉली हाउस पर ही एक पौंड बनाया है, जिसमें बारिश का पानी शामिल होता है. इसी पानी से ड्रिप इरिगेशन के जरिए वे खेती करते है.

अब वे सालाना दो बार इसकी क्रॉप लेते है. खेती से उनकी 20 लाख रुपए की आय हो रही है. इसमें 8 लाख की आय खीरे से हो रही है.

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