Mirzapur: 120 करोड़ का टोल घोटाला: एसआईटी गठित, महाकुंभ के बाद जांच में तेजी

 

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उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के लालगंज स्थित अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा समेत 42 टोल प्लाजा पर 120 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा ने इस मामले की जांच में तेजी लाने के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है. इससे पहले लखनऊ एसटीएफ ने तीन टोलकर्मियों को गिरफ्तार किया था. जिन्होंने विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग करके टोल वसूली की वास्तविक राशि छिपाई थी. जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ.

मिर्जापुर एसआईटी में लालगंज सीओ अशोक सिंह, इंस्पेक्टर जिगना शैलेश कुमार राय, एसओ लालगंज संजय सिंह, एसएसआई अजय कुमार मिश्र, साइबर प्रभारी अजय मिश्रा और सर्विलांस प्रभारी मानवेन्द्र सिंह शामिल हैं. महाकुंभ के दौरान पुलिस प्रशासन की व्यस्तता के कारण जांच में देरी हुई थी, लेकिन अब महाकुंभ समापन के बाद एसआईटी ने अपनी कार्रवाई को पुनः सक्रिय कर दिया है.

अब तक सावन लाल, मैनेजर मनीष मिश्रा, कर्मचारी राजू कुमार, और मुख्य आरोपी आलोक कुमार सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है. एसआईटी ने गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, और बरेली जिलों में स्थित सात टोल प्लाजा को नोटिस जारी किए हैं और अन्य टोल प्लाजा पर भी जांच जारी है. लालगंज थाने में पंजीकृत मुकदमे के बाद, देश के 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच के दायरे में आ चुके हैं. एसटीएफ के अनुसार मुख्य आरोपी आलोक कुमार सिंह ने एमसीए किया हुआ है और उसने स्वयं 42 टोल प्लाजा पर यह सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया था. इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिना फास्टैग वाली गाड़ियों या फास्टैग खाते में कम बैलेंस वाली गाड़ियों से टोल वसूला जाता था जो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के खाते में जमा न होकर निजी खातों में चला जाता था. एसआईटी टीम अब अन्य टोल प्लाजा पर भी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, लेकिन संभावना जताई जा रही के प्रदेश स्तरीय टीम भी गठित हो सकती है.

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