डीडवाना – कुचामन : कुचामन सिटी में पीएम श्री जवाहर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और समाज में जागरूकता फैलाना था. कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों, छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया.
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती मंजू चौधरी के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुई. उन्होंने कहा कि ऑटिज्म ग्रसित बच्चों की समस्या को लेकर समाज में जागरूकता की कमी है, जिससे लोग इसे एक बड़ी बीमारी समझ बैठते हैं. जबकि सही जानकारी और उचित व्यवहार से इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाया जा सकता है. उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि वे दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशील रहें और उनके प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाएं.
ऑटिज्म के लक्षण और अधिकारों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान संदर्भ व्यक्ति दयाराम ने ऑटिज्म के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत स्वलीनता (ऑटिज्म) को विकलांगता की श्रेणी में रखा गया है. यह एक न्यूरो-डिवेलपमेंटल विकार है, जिसमें व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है.
वह आंखों में आंखें डालकर बातचीत नहीं कर पाता और अक्सर गुमसुम रहता है. उन्होंने कहा कि ऑटिज्म ग्रसित बच्चों को सही मार्गदर्शन, समझ और सहयोग की जरूरत होती है, जिससे वे भी समाज में अपनी विशेष पहचान बना सकें.
संदर्भ व्यक्ति श्रीमती सुरज्ञान चौधरी ने ऑटिज्म ग्रसित बच्चों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से विशेष शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे ऐसे बच्चे एक आत्मनिर्भर जीवन जी सकें.
मित्रवत व्यवहार अपनाने पर जोर
विद्यालय के प्राचार्य भंवरलाल बुरड़क ने ऑटिज्म ग्रसित बच्चों के प्रति मित्रवत व्यवहार अपनाने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इन्हें समाज में समावेशित करने के लिए हमें धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उनके साथ व्यवहार करना चाहिए.
विद्यालय के उपप्राचार्या कमला रुलानिया, सुमन कुमावत, शारीरिक शिक्षक रामस्वरूप चौधरी, व्याख्याता हाकिम अली, प्रशासनिक अधिकारी संदीप जोशी, देवेंद्र सोनी, उमा सारस्वत, सुषमा राजावत, हंसा चौहान, डॉ. ईश्वर बेड़ा, मुकेश स्वामी, राजेश मुहाल सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी इस अवसर पर उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के बीच ऑटिज्म से संबंधित प्रश्नोत्तरी और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे वे इस विषय को बेहतर ढंग से समझ सकें. इस प्रकार, यह कार्यक्रम न केवल जानकारीपूर्ण रहा, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ.