राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंचे। यहां सिम्स ऑडिटोरियम में उन्होंने संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हर कोई काशीनाथ गोरे जैसा तो नहीं बन सकता, लेकिन हर किसी को स्वयंसेवक जरूर होना चाहिए। उन्होंने गोरे को लोकहितकारी और समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि अनुशासन और सेवा भाव से ही संघ मजबूत हुआ है।
भागवत ने कहा कि लोग अक्सर संघ के 100 वर्ष पूरे होने की चर्चा करते हैं, लेकिन इसे यहां तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं ने कितनी कठिनाइयों का सामना किया, यह बहुत कम लोग जानते हैं। संघ की विचारधारा घर से लेकर समाज और फिर राष्ट्र तक के दायित्व निभाने की प्रेरणा देती है, इसलिए हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की बात करते हैं।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने भी काशीनाथ गोरे से जुड़ी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वे डॉक्टर थे, तब गोरे उन्हें देवार मोहल्ले ले गए थे, जहां बच्चियों ने उनके पैर पखारकर सम्मान किया। उसी दिन लोग उन्हें “शनिचर डॉक्टर” कहने लगे। सिंह ने कहा कि गोरे ने शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
आयोजन समिति ने जानकारी दी कि स्मारिका में गोरे के सामाजिक योगदान, राष्ट्र सेवा और उनके जीवन के प्रेरणादायक प्रसंग शामिल किए गए हैं। गोरे ने अपना पूरा जीवन समाज और जरूरतमंदों की सेवा में लगा दिया था। वे कुष्ठ रोगियों की सेवा, कैंसर मरीजों की मदद और समाज कल्याण के कार्यों में हमेशा आगे रहे।
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। एसपीजी और पुलिस ने पहले ही रिहर्सल कर सुरक्षा का जायजा लिया था। भागवत पहली बार बिलासपुर में रात बिताएंगे और रविवार सुबह वंदे भारत एक्सप्रेस से आगे रवाना होंगे।