जबलपुर में एम.पी.ई.बी. कार घोटाला : फर्जी अनुबंध और धोखाधड़ी में चार गिरफ्तार, यादव कॉलोनी पुलिस चौकी की बड़ी कार्यवाही

जबलपुर : मध्य प्रदेश के जबलपुर में लॉर्डगंज थाना क्षेत्र की यादव कॉलोनी चौकी पुलिस ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो न्यू ब्रांड कारें कंपनी में लगाने के नाम पर किराए पर लेते थे और उसे हड़प लेते थे. इन जालसाजों ने चार कारों को इसी तरह झांसा देकर पार कर दिया. जहां ज्यादा कॉलोनी पुलिस चौकी में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है वही उनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है.

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चौकी प्रभारी ने दी मामले में जानकारी

थाना लार्डगंज चौकी यादव कॉलोनी अंतर्गत एम.पी.ई.बी. में कार लगाने के नाम पर फर्जी अनुबंध पत्र तैयार कर, फर्जी सील व हस्ताक्षर कर कमिशन के पैसे लेकर एवं कार गिरवी रखकर पैसे आपस में बांटने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने अंकित साहू पवन यादव रोहित सिंह और रितेश कनौजिया सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चार कारें, जिनकी कुल कीमत लगभग 62 लाख रुपये की जप्त की है, अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है.

 

रवि वर्मा (33 वर्ष), निवासी यादव कॉलोनी, संजय नगर, ने थाना लार्डगंज में शिकायत दर्ज कराई कि 4 जुलाई 2024 को पड़ोसी मोतीलाल चौधरी ने उसकी मुलाकात पवन यादव और अंकित साहू से कराई. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन शक्ति नगर जबलपुर में कार लगाने पर 22,600 रुपये प्रतिमाह का भुगतान होगा. रवि वर्मा ने 9 जुलाई 2024 को अपनी होंडा अमेज कार (एमपी 04 जेड ई 1373) सौंप दी. बाद में, इन लोगों ने उसे एक और गाड़ी लगाने का प्रस्ताव दिया, तो उसने 25 सितंबर 2024 को अपनी इनोवा क्रिस्टा (एमपी 20 जेड क्यू 6679) 75,000 रुपये प्रतिमाह पर दे दी.

आरोपियों ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के नाम से फर्जी अनुबंध तैयार कर उसकी छायाप्रति रवि वर्मा को दी. गाड़ी लगाने के लिए कमीशन के रूप में 70,000 रुपये रोहित सिंह और अंकित साहू के खातों में जमा कराए गए. केवल एक महीने का किराया मिला, जिसके बाद भुगतान बंद हो गया. रवि वर्मा को बाद में पता चला कि रोहित सिंह, जो खुद को एमपीईबी का असिस्टेंट इंजीनियर बताता था, ने धोखाधड़ी की साजिश रची थी.

पुलिस अधीक्षक जबलपुर सम्पत उपाध्याय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और नगर पुलिस अधीक्षक कोतवाली के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी लार्डगंज हरिकिशन आटनेरे चौकी प्रभारी अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर आरोपियों की तलाश की गई.अंकित साहू ने बताया कि वह पवन यादव की गाड़ी चलाता था और पवन की एमपीईबी में पहचान थी. उसने खुद की हुंडई वर्ना कार खरीदकर एमपीईबी में लगाई. रोहित सिंह, जो पहले एस.के. फाइनेंस में काम करता था, ने खुद को एमपीईबी का अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लिया। रोहित का काम था फर्जी अनुबंध पत्र तैयार कराना, जबकि अंकित और पवन ग्राहकों को लाने का काम करते थे। रितेश कनौजिया फर्जी अनुबंध पत्रों पर सील और हस्ताक्षर करता था.

चारों आरोपियों की निशानदेही पर चार कारें, कूटरचित अनुबंध पत्र और फर्जी सील जप्त कर ली गईं. आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जा रही है. यह घटना जालसाजी और धोखाधड़ी का बड़ा मामला है, जिसमें पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. क्या आप इस केस से संबंधित कोई और जानकारी चाहते हैं?

उल्लेखनीय भूमिका- आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी लार्डगंज हरिकिशन आटनेरे के नेतृत्व में चौकी प्रभारी यादव कालोनी उप निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, सउनि दानी सिंह महिला आरक्षक अलका वाडिवा, आरक्षक सौरभ शुक्ला सचिन, सिद्धार्थ, सौरभ लोहार की सराहनीय भूमिका रही.

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