समय के साथ जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी एडवांस हो रही साइबर क्रिमिनल्स के लोगों को ठगने के तरीके भी बदल रहे हैं. ये स्कैमर्स पैसे लूटने के नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं. हाल ही में साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) का एक मामला पुणे से सामने आया है, जिसमें 62 साल की रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने अपने 2.22 करोड़ रुपये गंवा दिए.
स्कैम के लिए बनाई कई महीनों की लंबी योजना
यह घोटाला एक ही दिन में अंजाम नहीं दिया गया. जालसाजों ने पीड़ित को फंसाने के लिए कई महीनों की एक योजना बनाई. जालसाजों ने खुद को सरकारी अधिकारी दिखाया और पीड़ित को हाई मैच्योरिटी बेनिफिट का वादा कर कई पॉलिसियां खरीदने के लिए तैयार कर लिया.
ऐसे हुआ फ्रॉड
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस कंप्लेंट के हिसाब से यह फ्रॉड 2023 के अंत में शुरू हुआ और हाल तक जारी रहा. इस दौरान, पीड़ित को सरकारी अधिकारियों के तौर पर खुद को दिखाने वाले लोगों से कई बार कॉल आए, जो खुद को वित्त मंत्रालय, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियों से जुड़ा बता रहे थे.
इन संगठनों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर इन घोटालेबाजों ने पीड़ित को हाई मैच्योरिटी बेनिफिट की गारंटी देकर कई इंश्योरेंस पॉलिसियां ऑफर की. पीड़ित को खुद पर भरोसा दिलाने के लिए इन घोटालेबाजों ने फाइनेंस एक्सपर्ट और सरकारी अधिकारियों के Fictitious Titles के साथ-साथ दीनदयाल उपाध्याय जैसी प्रमुख हस्तियों के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया. कॉल पर वो इतने कन्विंसिंग थे कि पीड़ित ने उनकी बातों पर भरोसा कर लिया. इस तरह समय के साथ, पीड़ित को कई बीमा पॉलिसी खरीदने के लिए उन्होंने राजी कर लिया और उन्हें GST, इनकम टैक्स (Income Tax), TDS, ट्रांजैक्शन फीस, वेरिफिकेशन चार्ज और NOC चार्ज सहित कई चार्जेज का भुगतान करने के लिए कहा गया.
स्कैमर्स ने चली चाल
रिपोर्ट के मुताबिक, स्कैमर्स ने अपने झूठ को बनाए रखने के लिए कम से कम 19 अलग-अलग पहचानों का सहारा लिया. जब भी पीड़ित ने इन पॉलिसियों के लिए पैसे भेजने के इंस्ट्रक्शन को फॉलो किया, तो स्कैमर्स ने उनसे प्रोसेसिंग या रिकवरी फीस के बहाने ज्यादा फंड ट्रांसफर करने के लिए कहा.
जैसे-जैसे यह स्कैम आगे बढ़ा, विक्टिम को कथित अधिकारियों से भी फोन आने लगे, उन्होंने दावा किया कि उसके पिछले पेमेंट धोखाधड़ी वाले खातों (Fraudulent Accounts) में भेज दिए गए थे. उन पैसों को रिकवर करने के लिए उन्हें और पेमेंट करने का निर्देश दिया गया, जिससे पीड़ित को और भी ज्यादा पैसे का नुकसान हुआ. महीनों तक चले इस स्कैम में, स्कैमर्स ने पीड़ित को डराकर और चालाकी से उसकी करोड़ों रुपये की सेविंग लूट ली.
पुलिस ने की अपील
पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और साथ ही उसने लोगों को सलाह दी कि वे ऐसे कॉल या ऑफर के झांसे में न आएं जो सुनने में बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव लगते हों. ध्यान दें कि देश में इंश्योरेंस और फाइनेंशियल बेनिफिट के नाम पर साइबर फ्रॉड की घटनाएं आम होती जा रही है. अपनी सुरक्षा के लिए, नीचे बताए सुरक्षा उपायों का पालन करना जरूरी है:
अगर आपको कोई अनजान व्यक्ति कॉल करके निवेश करने के लिए कहता है, भले ही वो खुद को सरकारी एजेंसियों या वित्तीय संस्थानों से जुड़ा हुआ बताता हो, उसके झांसे में न आएं और सबसे पहले कॉल करने वाले की आइडेंटिटी क्रॉस-चेक करें. जांच करने के लिए वेबसाइटों पर अवेलेबल ऑफिशियल कॉन्टैक्ट डिटेल का इस्तेमाल करें.