हेवेन ऑफ नॉर्थईस्ट अबतक रेल सुविधाओं से वंचित था. यहां की बड़ी आबादी ऐसी थी जिसे अभी तक ट्रेन देखने का सौभाग्य नहीं मिला था. उनलोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी हैं. आजादी के बाद पहली बार आइजोल में ट्रेन पहुंची है. अब मिजोरम भी भारतीय रेल के नक्शे पर शामिल हो गया है. नार्थ ईस्ट रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी के के शर्मा ने कहा कि इस रेलवे खंड के शुरू होने के साथ हीं नार्थ-ईस्ट के 8 में 4 राज्य असम, अरुणाचल, त्रिपुरा और मिजोरम की राजधानी रेलवे नेटवर्क से देश के अन्य हिस्सों से जुड़ जायेंगे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस सफलता को मिजोरम को भारत के दिलों से जोड़ने वाला परियोजना बताते हुए आने वाले कुछ महीनों में इसके शुरू होने की बात की हैं.
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम की राजधानी आइजोल को देश की मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाली बैरवी-साईंरंग नई रेल परियोजना अब बनकर तैयार हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के 11वे साल में इस रेलवे नेटवर्क को अगले कुछ महीनों में देश को समर्पित करेंगे. यह रेलवे मार्ग देश के अन्य हिस्सों से पूर्वोत्तर के संपर्क व्यापार और विकास के लिए अहम् साबित होगा.
कैसे जुड़ा आइजोल देश से
यदि अभी आप आइजोल आना चाहते हैं तो आपके पास दो विकल्प है। पहला हवाई मार्ग से तो दूसरा सड़क मार्ग से. मौजूदा समय में असम के सिलचर से आइजोल आने में सड़क के माध्यम से 8 से 10 घंटे का वक्त लगता है वहीं अब इस रेल नेटवर्क के जरिए यह दूरी तीन घंटे में पूरी हो सकेगी.
नार्थ ईस्ट रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी के के शर्मा ने कहा कि अभी बदरपुर असम से कथकल से भौरावी तक ट्रेनों का परिचालन है. भौरावी से कुर्तिकी, कानपुई, मुलखांग और सायरांग स्टेशन प्रमुख है. मजोरिम में कुल 51 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक है.
इस रेल प्रोजेक्ट से मिजोरम की राजधानी आइजोल तक भारतीय रेल तकरीबन 110 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रेनों का परिचलन कर सकती हैं. बहुत जल्द कमर्शियल ऑपरेशन के लिए शुरू होने जा रहा है.
कब हुई इस प्रोजेक्ट की शुरुआत
साल 2008 में आइजोल ट्रेन पहुंचने की परिकल्पना की गई. वैसे असली तौर पर काम को रफ्तार साल 2014 में मिली. जब बैरवी-साईंरंग रेल प्रोजेक्ट की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 नवंबर 2014 में रखी है. तकरीबन 5022 करोड़ की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में चार रेलवे स्टेशन है जो आने वाले समय में मिजोरम के लिए लाइफ लाइन का काम करेगा.
कुतुबमीनार से ऊंची पुल
इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजिनियर विनोद कुमार ने कहा कि पहाड़ी इलाके में कई जगहों पर ब्रिज का निर्माण किया गया है. ब्रिज नंबर 144 जो मूलखांग और साईंरंग रेलवे स्टेशन के बीच स्थित है यह इस प्रोजेक्ट का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज है जिसकी ऊंचाई 104 मीटर है यानी कुतुब मीनार से भी 42 मीटर ऊंचा हैं. पूरे नेटवर्क में छोटे-बड़े 154 पुल और 48 छोटे बड़े टनल हैं.
100 साल तक की मजबूती
भौगोलिक चुनौतियों और सीस्मिक जोन 5 होने के बावजूद रेलवे द्वारा बनाई गई इस प्रोजेक्ट की मजबूती तकरीबन 100 सालों से भी ज्यादा आंकी जा रही है. इस पूरे प्रोजेक्ट का डिजाइन आईआईटी कानपुर और आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से किया गया है. सीआरएस द्वारा 10 जून 2025 को इस लाइन को शुरू करने की हरी झंडी दे दी गई है.
दिल्ली टू आइजॉल डायरेक्ट
इस ट्रैक के बन जाने से दिल्ली से डायरेक्ट अब आप आइजोल आ सकते हैं. इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर विनोद कुमार का मानना हैं की इस रेलवे खंड से सबसे बड़ा फायदा मिजोरम में रहने वाले लाखों लोगों को होगा जो अब सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे और अब देश के किसी भी हिस्से में तक उनकी पहुंच आसान हो जाएगी. रेल नेटवर्क से जुड़ने के कारण माल परिवहन सस्ता और त्वरित होगा. अब शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए मिजोरम के लोगों का देश के अन्य भागों में जाना काफी सुगम हो जाएगा.