यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर आरोप लगाया कि उसकी कुछ नीतियां रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचा रही हैं और इसी कारण युद्ध खत्म होने में दिक्कत आ रही है। इस पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है और साफ कहा है कि किसी को बलि का बकरा बनाने से शांति नहीं आने वाली।
भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हित और वैश्विक शांति पर केंद्रित रही है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत ने शुरुआत से ही युद्धविराम और संवाद का समर्थन किया है। भारत का मानना है कि केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस लंबे संघर्ष का समाधान निकाला जा सकता है।
भारत ने अमेरिका को याद दिलाया कि उसने कई बार मानवीय आधार पर यूक्रेन को मदद भेजी है और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर शांति की अपील की है। साथ ही रूस के साथ भी भारत ने बातचीत बनाए रखी है ताकि तनाव कम करने के प्रयास किए जा सकें। विदेश मंत्रालय का कहना है कि किसी एक देश को दोष देना न तो न्यायसंगत है और न ही इससे कोई सकारात्मक नतीजा निकलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह रुख उसकी संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। भारत न तो पश्चिमी देशों की लाइन पूरी तरह लेता है और न ही रूस से दूरी बनाता है। इसी वजह से भारत आज वैश्विक राजनीति में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका में देखा जा रहा है।
अमेरिका और यूरोप जहां रूस पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, वहीं भारत का मानना है कि युद्ध के मैदान से ज्यादा बातचीत की मेज पर हल निकलेगा। यही कारण है कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री दोनों समय-समय पर सभी पक्षों से शांति बहाल करने की अपील करते रहे हैं।
भारत के इस बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में अपनी नीति नहीं बदलेगा और स्वतंत्र विदेश नीति को प्राथमिकता देता रहेगा।