PM मोदी ने BJP सदस्यता रिन्यू की, बोले- ये अभियान वैचारिक और भावनात्मक आंदोलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (2 अगस्त) को अपनी बीजेपी सदस्यता रिन्यू कराई. इसी के साथ बीजेपी के सदस्यता अभियान की शुरुआत हो गई. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, बीजेपी को बनाने के लिए लोगों ने अपने जीवन को खपाया है.

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बीजेपी के सदस्यता अभियान 2024 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज सदस्यता अभियान का एक और दौर प्रारंभ हो रहा है. भारतीय जनसंघ से अब तक हमने देश में एक नई राजनीतिक संस्कृति लाने का भरसक प्रयास किया है. अगर किसी दल में आंतरिक लोकतंत्र निरंतर नहीं पनपता तो वैसी स्थिति बनती है जो आज हम देश के कई दलों की देख रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, बीजेपी अपने संविधान के हिसाब से चलती है. यह सदस्यता अभियान वैचारिक आंदोलन भी है और भावनात्मक आंदोलन भी. पीएम ने कहा कि हमारी भावनाएं देशभक्ति से प्रेरित हैं. उन्होंने कहा कि जब तक जिस संगठन के माध्यम से या जिस राजनीतिक दल के माध्यम से देश की जनता सत्ता सुपुर्द करती है.

पीएम मोदी ने आगे कहा कि बीजेपी ही एकमात्र दल है, जो अपनी पार्टी के संविधान के अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपने काम का विस्तार कर रहा है और जन-सामान्य की आशा, आकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए अपने आप को निरंतर योग्य बनाते रहता है.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं जब राजनीति में नहीं था, तो जनसंघ के जमाने में बढ़े उत्साह के साथ कार्यकर्ता दीवारों पर दीपक पेंट करते थे तो कई राजनीतिक दल के नेता अपने भाषणों में मजाक उड़ाते थे. वे कहते थे कि दीवारों पर दीपक पेंट करने से सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंचा जा सकता है. पीएम मोदी ने कहा कि हम वो लोग हैं, जिन्होंने श्रद्धा से दीवारों पर कमल पेंट किया, क्योंकि विश्वास था कि दीवारों पर पेंट किया कमल कभी न कभी तो दिलों पर भी पेंट हो जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज भी कुछ राज्यों में बीजेपी के कार्यकर्ता उसी जीवन को जीते हैं और अपने आदर्शों के लिए जूझते हैं. हमारे कार्यकर्ताओं के लिए कहा जाता था कि उसका एक पैर रेल में होता है और दूसरा जेल में होता है. पीएम ने कहा कि रेल में इसलिए होता है कि बीजेपी का कार्यकर्ता निरंतर भ्रमण करता था, प्रवास करता था और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए सत्ता पर बैठे हुए लोगों के सामने संघर्ष करता था. इसलिए कभी जेल तो कभी बाहर  ये उसकी स्थिति होती थी.

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