प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के दूसरे हफ्ते में मणिपुर का दौरा कर सकते हैं. यह उनका पहला दौरा होगा, जबसे 2023 में राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़की थी. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी इंफाल और चुराचांदपुर जिलों का दौरा करेंगे और वहां हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों से मिलेंगे. अपने दौरे में वे कई नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की घोषणा करेंगे और कुछ परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे. इस दौरे के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि पीएम के दौरे के समय शांति बनी रहे.
सूत्रों के मुताबिक, मई 2023 से अब तक मणिपुर में हुई हिंसा में 250 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. राज्य में इस साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसे अगस्त में और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया. राष्ट्रपति शासन के बाद हालात कुछ हद तक सामान्य हुए हैं. सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस ने लूटे गए हजारों हथियारों में से करीब 3,000 हथियार बरामद भी किए हैं.
मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में हिंसा की शुरुआत हुई थी. कुकी समुदाय के प्रदर्शन के बाद मणिपुर में हिंसा भड़की थी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए. गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर का दौरा भी किया. शांति बहाल करने के लिए कई कदम उठाए गए. बावजूद इसके वहां आए दिन छिटपुट हिंसा होती रही.
21 महीने की हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन
वहीं, 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया. मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि पार्टी के भीतर नेतृत्व पर सहमति नहीं बनी. 21 महीने की हिंसा के बाद यह कदम उठाया गया. कांग्रेस ने इस पर भी सवाल उठाया और बीजेपी पर निशाना साधा. कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला देरी से लिया गया. कांग्रेस ने कहा कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन है. केंद्र सरकार का दावा है कि मणिपुर में हिंसा कम हुई है और शांति के लिए प्रयास जारी हैं.