प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों में नई मजबूती और गहराई जोड़ दी है. इस दौरे में दोनों देशों के बीच ना सिर्फ आर्थिक सहयोग को लेकर ऐतिहासिक घोषणाएं हुईं, बल्कि शीर्ष नेताओं के बीच अभूतपूर्व स्तर की नजदीकी भी देखने को मिली.
पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम में शामिल हुए, जहां दोनों ने आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने का साझा विजन रखा. इसके बाद इशिबा ने पीएम मोदी का औपचारिक स्वागत किया. दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई और जापानी प्रधानमंत्री ने मोदी के सम्मान में डिनर का आयोजन भी किया.
अगले दिन दोनों नेता शिंकानसेन बुलेट ट्रेन से टोक्यो से सेंदाई तक की यात्रा पर साथ रहे. इस दौरान उन्होंने एक साथ भोजन किया और टोक्यो इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री का दौरा भी किया. इस तरह दो दिनों के अधिकांश समय दोनों नेता एक साथ नजर आए.
ऐतिहासिक निवेश और अहम समझौते
जापान ने पीएम मोदी की यात्रा के दौरान बड़ा ऐलान किया है. अगले 10 सालों में भारत में 10 ट्रिलियन येन की प्राइवेट इन्वेस्टमेंट होगी, जिसे इस दौरे की सबसे अहम उपलब्धि माना जा रहा है. इस यात्रा ने आने वाले दशक के लिए भारत-जापान संबंधों की दिशा तय कर दी है. इस रोडमैप का सबसे अहम हिस्सा है- ‘इंडिया-जापान जॉइंट विजन फॉर द नेक्स्ट डिकेड’… इसमें आर्थिक विकास से लेकर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार, स्वास्थ्य, सतत विकास, मोबिलिटी और आपसी आदान-प्रदान तक कई अहम क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
भारत और जापान के बीच रक्षा, मानव संसाधन आदान-प्रदान, डिजिटल नवाचार, क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, अंतरिक्ष सहयोग और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौते (MoUs) हुए.
द्वि-दलीय समर्थन में जड़ें जमा रही साझेदारी
इस दौरे की एक खास बात यह रही कि भारत-जापान साझेदारी को जापान में द्वि-दलीय समर्थन प्राप्त है. प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों योशीहिदे सुगा और फूमियो किशिदा से मुलाकात की. इसके अलावा उन्होंने संसद अध्यक्ष और सांसदों के एक समूह से भी चर्चा की.
यही नहीं, एक अनोखी पहल के तहत जापान के 16 प्रीफेक्चर्स (जो भारत में मुख्यमंत्रियों के समकक्ष हैं) के गवर्नरों ने टोक्यो आकर पीएम मोदी से मुलाकात की. इस तरह का राज्य स्तरीय जुड़ाव भारत-जापान संबंधों की गहराई का अद्वितीय उदाहरण है.