जशपुर जिले के कुनकुरी में मतांतरण का मामला सामने आया है। होली क्रॉस नर्सिंग कॉलेज की फाइनल ईयर की छात्रा अमिषा बाई (21) ने प्रिंसिपल पर आरोप लगाया है कि सिस्टर विंसी जोसेफ ने उसपर नन बनने का दबाव डाला।
अमिषा के मुताबिक, सिस्टर विंसी ने उसे विदेश में नौकरी और अच्छे वेतन का प्रलोभन भी दिया। मना करने पर प्रताड़ित कर एक साल पहले उसे छात्रावास से निकाल दिया गया। पीड़िता ने SSP से शिकायत की है।
प्रशासन ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। बजरंग दल के जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह जूदेव ने कॉलेज की मान्यता रद्द करने की मांग की है। उन्होंने मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। हालांकि प्रिंसिपल ने इन आरोपों को खारिज किया है।
बेटी सनातन धर्म नहीं छोड़ेगी – पिता
पीड़िता के पिता मुन्नाराम का कहना है कि उनकी बेटी किसी भी स्थिति में सनातन धर्म नहीं छोड़ेगी। उन्होंने बताया कि अगर अमिषा अविवाहित रहने का निर्णय भी करती है तो वह किसी सनातनी संस्था से जुड़ कर मानवता की सेवा करेगी।
अमिषा ने भी कहा कि किसी भी स्थिति में ना तो सनातन धर्म को छोड़ेगी और ना ही परिवार को। उसकी पढ़ाई के लिए उसकी मां और भाईयों ने दिन-रात मेहनत की है। इसलिए वह परिवार का साथ किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ेगी।
शैक्षणिक संस्थाओं की जांच की मांग
हॉली क्रॉस नर्सिंग कॉलेज पर लगे मतांतरण के आरोप के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को बजरंग दल के जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह जूदेव पीड़िता से मिलने कुनकुरी पहुंचे। यहां उन्होंने पीड़िता से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
आदित्य सिहं ने परिजनों से चर्चा कर आश्वस्त किया कि पूरा बजरंग दल मजबूती से खड़ा हुआ है। उसे किसी से डरने या दबाव में आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने मतांतरण के लिए शैक्षणिक संस्था और चिकित्सा संस्थाओं के दुरूपयोग पर सभी संस्थाओं की जांच की मांग की है।
अमीषा के मामले में विवादित हॉली क्रॉस नर्सिंग कालेज की मान्यता रद्द कर ताला लगाने की मांग की है। मांग पूरी ना होने पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
बड़ी बहन को नहीं दिया पंजीयन प्रमाण पत्र
पीड़िता अमिषा ने बताया कि उसकी बड़ी बहन दुर्गेश्वरी बाई भी एक साल पहले इसी कॉलेज से पास हुई है। लेकिन 15 हजार फीस बकाया बता कर प्राचार्य ने उसे पंजीयन प्रमाण पत्र नहीं दिया।
दुर्गेश्वरी इन दिनों रायपुर के एक निजी नर्सिंग होम में नौकरी कर रही है। लेकिन पंजीयन प्रमाण पत्र ना होने से उसे कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़िता का आरोप है कि दुर्गेश्वरी की पढ़ाई पूरी होने के बाद नर्सिंग कॉलेज ने लगभग 6 माह तक अस्पताल में दुर्गेश्वरी से नौकरी कराया। लेकिन वेतन के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया।
अब 15 हजार रूपए फीस बकाया बता कर पंजीयन प्रमाण पत्र देने में आनाकानी कर रहे हैं।
प्राचार्य ने आरोपों को बताया निराधार
कॉलेज की प्राचार्य सिस्टर विंसी जोसेफ ने छात्रा द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अमिषा जनवरी से अनुपस्थित थी और उसने परीक्षा में शामिल होने के लिए जरुरी ट्रेनिंग पूरी नहीं की।
इसलिए उसे अगले साल परीक्षा देने की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि छात्रा अपनी कमी छुपाने के लिए इस प्रकार के झूठे आरोप लगा रही है।