छत्तीसगढ़ में 14 मंत्रियों के गठन को लेकर जारी सियासी विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी लोग सवाल उठा रहे हैं, उन्हें न्यायालय पर भरोसा रखना चाहिए। उनका कहना है कि हरियाणा में भी लंबे समय से 14 मंत्रियों की व्यवस्था चल रही है और अगर कोई कोर्ट में जाता है, तो वह अपना हक इस्तेमाल कर सकता है। अंतिम निर्णय केवल न्यायालय का होगा और इसमें किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।
रमन सिंह ने यह भी कहा कि कैबिनेट में 14 मंत्री होना अच्छी बात है। उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल बनने की अटकलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह छत्तीसगढ़ में ही रहकर विधानसभा का संचालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब अध्यक्ष निष्पक्ष होता है, तो कार्य प्रणाली सुचारू रूप से चलती है। मीडिया कभी-कभी मामलों को गलत तरीके से पेश करता है, इसलिए उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें छत्तीसगढ़ में ही काम करने दिया जाए।
रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी तीखा हमला बोला। उनका कहना था कि भूपेश बघेल को अब किसी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पांच साल के शासन में उन्होंने पर्याप्त अनुभव प्राप्त कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल के शासनकाल में कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं, आधे लोग जेल में हैं और आधे बेल पर हैं। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस की हिंदुत्व के खिलाफ विचारधारा पर सवाल उठाया और सलवा जुडूम मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई देरी के लिए बी. सुदर्शन रेड्डी पर भी निशाना साधा।
डॉ. रमन सिंह ने यह स्पष्ट किया कि न्यायालय का निर्णय ही अंतिम होगा और इसमें किसी भी तरह की चिंता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि विवाद के समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करें। उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक स्थिरता और विधानसभा का सुचारू संचालन ही राज्य के लिए सर्वोपरि है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रमन सिंह के बयान से साफ संदेश गया है कि वे विवादित मामलों में निष्पक्ष रहकर केवल कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक वाद-विवाद के बीच कानून और नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।