सोनभद्र: रेणुकूट में डब्लू सिंह ने बताया जहाँ एक ओर हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Hindalco) अपने यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों को लेकर हर महीने अपनी पीठ थपथपाती है, वहीं दूसरी ओर कंपनी पर अपने ही कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगा है. रेनूसागर, महान और रेणुकूट प्लांट के भीतर कार्यरत स्टाफ और स्थायी कर्मचारियों को जहाँ आवागमन के लिए वीआईपी जैसी विशेष व्यवस्थाएं दी गई हैं, वहीं संविदा और ठेका श्रमिकों को ऐसी किसी भी सुविधा से वंचित रखा गया है.
इस भेदभावपूर्ण नीति ने श्रमिकों के बीच रोष पैदा कर दिया है. एक श्रमिक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है? हम भी उसी कारखाने में काम करते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं. फिर हमारे साथ यह भेदभाव क्यों?”
कर्मचारी और ठेका श्रमिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा को लेकर खड़ा हुआ है. कंपनी के अंदर आवागमन के लिए कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण ठेका श्रमिकों को अक्सर असुरक्षित तरीकों से यात्रा करनी पड़ती है. यह स्थिति किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है. यदि कोई गंभीर घटना घटती है जिसमें किसी मजदूर की जान चली जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
सवाल यह है कि उस मजदूर के परिवार को कौन संभालेगा, और उनकी आर्थिक स्थिति का क्या होगा? प्रबंधन की यह लापरवाही सिर्फ नैतिकता का ही नहीं, बल्कि कानूनी नियमों का भी उल्लंघन है. कई श्रम कानूनों के तहत, सभी कर्मचारियों को समान सुरक्षा और सुविधाएँ प्रदान करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है.
हिंडालको प्रबंधन की चुप्पी
जब इस मामले पर हिंडालको प्रबंधन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली. प्रबंधन ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. कंपनी की इस चुप्पी ने आरोपों को और भी मजबूत कर दिया है.
ठेका श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर जल्द ही श्रम विभाग और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों से शिकायत करने की बात कही है। यह मामला अब सिर्फ एक सुविधा का नहीं, बल्कि मानव गरिमा और सुरक्षा के अधिकार का बन गया है. अब देखना यह है कि क्या प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर कोई कार्रवाई करता है या इसे भी अनदेखा कर देता है.