देवास शहर व अंचल के कई निजी व सरकारी स्कूलों की लापरवाही ने कक्षा पांचवीं व आठवीं के कई ऐसे होनहार विद्यार्थियों को फेल करवा दिया है जिन्होंने 90 प्रतिशत से भी अधिक अंक हासिल किये हैं। स्कूल प्रबंधनों द्वारा विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट व अर्द्धवाषिक परीक्षा के नंबर पोर्टल पर दर्ज नहीं किए गए जिसके कारण विद्यार्थी इसमें फेल हो गए हैं।
इस लापरवाही ने जिले के परीक्षा परिणाम को भी काफी हद तक प्रभावित किया है। प्रोजेक्ट व अर्द्धवाषिक परीक्षा के अंकों को पोर्टल के दर्ज करने के बार-बार निर्देशों के बावजूद स्कूलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वहीं अधिक अंक आने के बावजूद विद्यार्थियों के फेल होने से पालकों में भी स्कूल प्रबंधन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
निजी स्कूल स्वयं करते हैं अंकों की इंट्री
अर्द्धवाषिक परीक्षा व प्रोजेक्ट के अंक दर्ज करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों को सुविधा दी गई है। स्कूलों के लागइन आइडी व पासवर्ड का उपयोग करके स्कूल प्रबंधन द्वारा पोर्टल पर अंक दर्ज किये जाते हैं। इसके बावजूद कई स्कूलों में अंक दर्ज करने को लेकर ढीलपोल की गई।
कुछ स्कूल प्रबंधन अंक दर्ज नहीं होने का कारण पोर्टल में तकनीकी त्रुटि होना बता रहे हैं। यह भी जानकारी सामने आई है कि कुछ स्कूल के कुछ विद्यार्थियों के अंक दर्ज हो गए जबकि कुछ के नहीं हो पाये हैं। वहीं यह भी माना जा रहा है कि अंक दर्ज करते समय सावधानी नहीं रखने के कारण ऐसा हुआ है।
देवास विकासखंड में करीब 20 स्कूलों के अंक नहीं हुए दर्ज
जिला शिक्षा केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार देवास विकासखंड में ऐसे स्कूलों की अब तक सामने आई संख्या लगभग 20 के आसपास है जिनके पांचवीं, आठवीं के विद्यार्थियों के अंक पोर्टल पर दर्ज नहीं हुए हैं। इनमें से अधिकांश निजी स्कूल हैं, दो से तीन स्कूल सरकारी भी इनमें शामिल हैं। इसके अलावा अंचल के भी कई स्कूलों में यह लापरवाही सामने आई है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो परिणाम घोषित होने के दो-तीन दिन पहले ही कई स्कूलों ने अंक दर्ज करने का काम पूरा किया था। बार-बार के निर्देश के बावजूद इसमें लापरवाही की गई थी। यदि ये स्कूल ऐन वक्त पर अंक नहीं दर्ज करते तो स्कूलों की संख्या सैकड़ों रहती है जिनके बच्चे फेल हो जाते।
40 अंक रहते हैं आंतरिक मूल्यांकन व प्रोजेक्ट के
देवास विकासखंड स्रोत समन्वयक किशोर वर्मा के अनुसार पांचवीं, आठवीं में विषयों की लिखित परीक्षा 60 अंकों की होती है। इसके अलावा 20-20 अंक अर्द्धवाषिक परीक्षा व प्रोजेक्ट के होते हैं, इनमें भी उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके साथ ही सह पाठ्यक्रम गतिविधियों की ग्रेड मिलती है, हालांकि इसको मुख्य परीक्षा परिणाम में जोड़ा नहीं जाता। जिन विद्यार्थियों के अंक दर्ज नहीं हुए हैं उसके संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
अब डीपीसी या फिर बीआरसी स्तर से ही अंक हो पायेंगे दर्ज
स्कूल प्रबंधनों को अर्द्धवाषिक परीक्षा व प्रोजेक्ट आदि के अंक दर्ज करने की सुविधा फिलहाल अभी नहीं मिल पायेगी। जिन विद्यार्थियों के अंक दर्ज नहीं हुए हैं उनका शेष कार्य पोर्टल दोबारा खुलने पर या तो डीपीसी या फिर बीआरसी स्तर से ही किया जा सकेगा। निजी स्कूल अपने लागइन व पासवर्ड से अंक दर्ज नहीं कर पायेंगे।